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भज़न 143:10
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
मेरअ परमेशर आसा तूह, ज़ुंण तूह च़ाह कि हुंह करूं, तैहा गल्ला खोज़ मुखा, तूह लोल़ी मुल्है भलअ रहअ अर तूह नढैऊ मुंह राम्बल़ी बाता।
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भज़न 143:8
धैल़ लोल़ी मुंह दोत्ती तेरी अटल़ झ़ूरी आद फिरी, किल्हैकि हुंह रहा तेरै आसरै। हुंह सभाल़ा आपणीं सोभै गल्ला ताखा, तूह खोज़ मुखा आप्पै कि हुंह कैहा बाता हांढूं।
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भज़न 143:9
हे बिधाता, मंऐं आसा ताह सेटा शरण लई दी। ज़ीबाण, तूह बच़ाऊ मुंह मेरै दुशमणा का।
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भज़न 143:11
हे बिधाता, तूह डाह मेरी ज़िन्दगी बच़ाऊई, ज़ेही तेरी ज़बान शुची हआ, किल्हैकि तेरै सत्ता करै जाणअ हुंह आफ़ता का बच़ी।
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भज़न 143:1
हे बिधाता, मेरी अरज़ शुण! तूह आसा शुचअ अर धर्मीं, तूह शुण मेरी लेर-पकार।
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भज़न 143:7
हे बिधाता, ज़ीबाण, तूह शुण ऐबै मेरी पकार! मंऐं हेरअ हैअ चोल़ी। तूह निं मुंह बाखा पिठ फरेऊई, नांईं ता हुंह हणअ घोरी दाबै दै मूंऐं दै मणछा ज़िहअ।
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भज़न 143:5
मुंह फिरा पराणअ ज़मानअ आद, हुंह करा तेरै तिन्नां महान कामें बारै बच़ार, तंऐं किऐ दै तिन्नां नुआहरै कामें बारै रहा हुंह सोठदअ लागी।
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