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भज़न 142:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हे बिधाता, मंऐं पाई ताह सेटा लेर-पकार कि तूह कर मेरी मज़त, मुंह बच़ाऊंणै आल़अ आसा तूह ई, आपणीं ज़िऊंदी ज़िता च़ाहा हुंह सिधअ ताह ई।
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भज़न 142:7
एऊ कैद खानै का काढ मुंह पोर्ही, तै करनी मुंह तेरै धर्मीं मणछे सभा दी तेरी ज़ै-ज़ैकार, किल्हैकि तंऐं किई मुल्है खास्सी भलाई।
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भज़न 142:3
ज़ेभै मुखा छ़ाड़ च़ाल्ली छ़ुटी, तेभै हआ तिधी तूह ई मेरी मज़त करदअ। ज़हा बाता हुंह डेऊई च़ाल्लअ त, तेथ थिअ मेरै दुशमणै मुल्है खल़ाक्की डाही दी ढोही।
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भज़न 142:1
हे बिधाता, हुंह मांगा ताखा मज़त, हुंह पाआ ताह सेटा लेर-पकार।
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भज़न 142:6
मेरी लेर-पकार शुण कि हुंह मांगा ताखा मज़त, मेरी हुई ऐबै खास्सी बूरी दशा, मुंह बच़ाऊ इना मेरै दुशमणा का! किल्हैकि मुखा निं इना जोगी ज़ोर आथी।
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