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भज़न 143

143
बिधाता का अरज़ ज़ेभै घाटी-घाटी आई
राज़ै दाबेदो भज़न
1हे बिधाता, मेरी अरज़ शुण!
तूह आसा शुचअ अर धर्मीं,
तूह शुण मेरी लेर-पकार।
2हुंह करा तेरी ई च़ाकरी, मुंह परखदअ निं लागी,
किल्हैकि सोभी मणछा दी आसा किज़ै नां किज़ै खोट ज़रूर।#रोम. 3:20; 1 करि. 4:4; गल. 2:16
3मेरै दुशमण आसा मुंह मारना लै पिछ़ू पल़ै दै,
तिन्‍नैं आणअ हुंह पठी छेऊई।
तिन्‍नैं आसा हुंह नटिप्प न्हैरै दी कैद किअ द,
मेरी हालत आसा मूंऐं दै मणछा ज़ेही हुई दी।
4ऐबै छ़ुटी मुखा छ़ाड़,
मंऐं हेरअ ऐबै हैअ चोल़ी।
5मुंह फिरा पराणअ ज़मानअ आद,
हुंह करा तेरै तिन्‍नां महान कामें बारै बच़ार,
तंऐं किऐ दै तिन्‍नां नुआहरै कामें बारै रहा हुंह सोठदअ लागी।
6हुंह करा उझै ताह बाखा बाहा फुआरी अरज़,
हुंह आसा ताल्है पाणीं बाझ़ी शुक्‍की ज़िम्मीं ज़िहअ नचिशअ।
7हे बिधाता, ज़ीबाण, तूह शुण ऐबै मेरी पकार!
मंऐं हेरअ हैअ चोल़ी।
तूह निं मुंह बाखा पिठ फरेऊई,
नांईं ता हुंह हणअ घोरी दाबै दै मूंऐं दै मणछा ज़िहअ।
8धैल़ लोल़ी मुंह दोत्ती तेरी अटल़ झ़ूरी आद फिरी,
किल्हैकि हुंह रहा तेरै आसरै।
हुंह सभाल़ा आपणीं सोभै गल्‍ला ताखा,
तूह खोज़ मुखा आप्पै कि हुंह कैहा बाता हांढूं।
9हे बिधाता, मंऐं आसा ताह सेटा शरण लई दी।
ज़ीबाण, तूह बच़ाऊ मुंह मेरै दुशमणा का।
10मेरअ परमेशर आसा तूह,
ज़ुंण तूह च़ाह कि हुंह करूं, तैहा गल्‍ला खोज़ मुखा,
तूह लोल़ी मुल्है भलअ रहअ अर तूह नढैऊ मुंह राम्बल़ी बाता।
11हे बिधाता, तूह डाह मेरी ज़िन्दगी बच़ाऊई, ज़ेही तेरी ज़बान शुची हआ,
किल्हैकि तेरै सत्ता करै जाणअ हुंह आफ़ता का बच़ी।
12हुंह आसा तेरअ दास, मेरै दुशमण
ज़ुंणी हुंह हंती-हंती छेऊई आणअ, तिन्‍नां कर पठी बरैबाद
ताकि थोघ लागे कि तूह झ़ूरा मुल्है खास्सअ।

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भज़न 143: OSJ

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