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मन की युद्धभूमिSample

मन की युद्धभूमि

DAY 67 OF 100

डि. वि.

उसने मुझ से कहा वह और उसकी पत्नी चौड़ में मिशनरी थे, जो अफ्रिका में है, और तब उसने कहा, ‘‘हम जनवरी में आने की योजना बना रहे हैं, यदि परमेश्वर ने चाहा तो।'' 

मुझे नहीं मालूम था कि डि. वि. का अर्थ क्या है, परन्तु मैंने कुछ नहीं कहा। 

जैसे जैसे उसने देश के लिए सुसमाचार का विवरण दिया वह लगातार डि. वि. कहता रहा। 

अन्ततः मैंने पूछा, ‘‘डि. वि. का क्या अर्थ है?''

‘‘यह एक लाटिन शब्द है, जिसे मैंने स्कूल में सिखा था। यह मेरे लिए भहुमुल्य है, उसने कहा। उसे ड़िओं वोलेंन्टे कहते है, और इसका अर्थ है, ‘यदि परमेश्वर ने चाहा तो।''

जैसे हमने बात किया में समझी कि डि. वि. से उसका कितना गहरा तात्पर्य था। उसने कहा कि उसके पास बहुत सी बड़ी योजनाएँ हैं जो वह चौड़ में घटित होते हुए देखना चाहता है। परन्तु वह इन सब से बढ़कर यह देखना चाहता था कि उसके योजनाएँ परमेश्वर के योजनाओं के साथ है। जब मैं डि. वि. कहता हूँ, यह मेरे लिये एक स्मरण सूचक है। यह मेरे कहने का एक तरीका है। यही मैं चाहता। क्या प्रभु तू इसमें सहमत है?

यह मिशनरी याकूब के किताब के वचनों से सहमति रखता था और मैं उसके दीन स्वभाव को पसन्द करती थी। वह भविष्य के बारे में चिन्तित नहीं था। परंतु जैसे जैसे उसने आगे देखा उसने कहाँ, ‘‘मैं स्वयं को यह स्मरण दिलाता हूँ कि निर्णय करनेवाला तो परमेश्वर ही है।'' उसने लिखित किया कि बहुत से मसीही जैसे वे चाहते हैं जीवन की योजना बनाते हैं। मानो वे ऐसा कह रहे हैं, ‘‘परमेश्वर में ऐसा करने जा रहा हूँ, मुझे आशा है कि तू भी इस में सहमत है।''

याकूब इसे घमण्ड कहता है। ‘‘पर तुम अब अपने डींग मारने पर घमण्ड करते होय ऐसा सब घमण्ड बुरा होता है।'' (याकूब 4:16)।

परमेश्वर हमें यहाँ पर और अभी जीने के लिये बुलाता है। और एक एक दिन के लिये जीने के लिये बुलाता है। बहुत से लोग हैं जो छल करते हैं। जैसा वे चाहते हैं वैसा वे निर्णय लेते हैं और चाहते हैं कि सब कुछ आसानी से होता रहे। यह शैतान की एक चाल भी हो सकती है। यदि वह उन्हें कल या अगले साल पर ध्यान केन्द्रित करने में सफल कर देता हैं, तो उन्हें अभी की समस्याओं पर काम करने की जरूरत नहीं पड़ती। वे एक ऐसी संसार में जी सकते हैं जहाँ पर केवल अच्छी बातें ही होंगी। क्या यह सामने की वस्तुओं को अनदेखा करके हाइवे पर कॅार चलाने के जैसा नहीं है? क्योंकि हमारा ध्यान तो पाँच किलोमिटर आगे की ट्राफिक सिगनल पर है। हम स्वयं को एक बिगाड़ के लिये तैयार कर रहे हैं।

हम में से कोई नहीं जानता कि आगे क्या है? हम सोच सकते हैं और योजना बना सकते हैं। परन्तु यह परमेश्वर के ऊपर है, कि ऐसी योजनाएँ घटित हो। बहुत कम लोग जानते हैं कि कैसे संपूर्ण रीति से एक एक दिन के लिये जीया जा सकता है। इसका तात्पर्य है, वर्तमान में जीना और जीवन जैसा है उसका आनन्द उठाना। यदि हम आगे देखते है, हम करते, और कहते हैं। परमेश्वर मुझे अपनी इच्छा दिखा, ताकि मैं गर्व न करूँ और तुझ से आगे न भागूँ।

यीशु ने हमें एक बहुतायत की जीवन की प्रतिज्ञा की है। (यूहन्ना 10ः10 देखें)। परन्तु हम उस बहुतायत में प्रवेश नहीं कर सकते हैं, यदि हम अपने जीवन को संपूर्ण रूप से उसे नहीं देते हैं। कल की योजना को बनाते हुए आज का दिन व्यतीत न करें, कि हम उन मुद्दों को अनदेखा कर दें जिसका सामना आज हमें करना है। यह शैतान की पुरानी चालों में से एक है, कि हम कल के लिये चिन्ता करें और आज को अनदेखा कर दें।

‘‘मेरे स्वर्गीय पिता, आज जीने के लिये मेरी सहायता कर। चाहे मैं डि.वि. शब्द कहूँ या न कहूँ। मुझे स्मरण दिला कि मेरे जीवन में तेरी इच्छा सब से महत्वपूर्ण है। मेरी सहायता कर कि शैतान मुझे कल के बारे में ज्यादा सोच में डालने न पाए। कि मैं आज न जी पाऊँ, जिस मार्ग से तू प्रसन्न होता है। यीशु मसीह के नाम में। आमीन।''


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मन की युद्धभूमि

जीवन कभी-कभी हम में किसी को भी ध्यान ना देते समय पकड़ सकता है। जब आप के मन में युद्ध चलना आरम्भ होता है, दुश्मन परमेश्वर के साथ आपके संबंध को कमजोर करने के लिए उसके शस्त्रगार से प्रत्येक शस्त्र को इस्तेमाल करेगा। यह भक्तिमय संदेश आपको क्रोध, उलझन, दोष भावना, भय, शंका. .

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