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भज़न 28

28
बिधाता का अरज़
राज़ै दाबेदो भज़न
1हे बिधाता, तूह ई आसा सह बडी टोल्ह ज़ेथ पिछ़ू हुंह शरण लआ।
हुंह पाआ ताह सेटा पकार।
मेरी लेर-पकार शुण! ज़ै तूह नांईं शुणें,
मुखा छ़ुटणीं छ़ाड़ संघा जाणअ हुंह मरी।
2ज़ीबाण, मेरी प्राथणां अर मेरी लेर-पकार शुण कि हुंह मांगा ताखा मज़त,
हुंह फुआरा तेरै भबना बाखा आपणीं बाहा।
3मुंह निं कदुष्ट मणछे संगती दी गणी,
तिंयां ज़ुंण कबध खटा अर
आपणैं साथी-संघी संघै गल्‍ला, करा तिंयां मिठी पर
दिलै डाहा तिंयां ज़ीद।
4तिन्‍नां लै कर तिहअ बभार ज़ुंण तिन्‍नां लै हुअ लोल़ी,
ज़ुंण तिन्‍नैं कदुष्ट काम किऐ,
तेता लै दै तिन्‍नां लै सज़ा अर
तिन्‍नां लोल़ी तिन्‍नें पापो तिहअ ई फल भेटअ।
5किल्हैकि तिंयां कदुष्ट मणछ निं ताह बिधाते महान कामां बाखा टेरअ बी भाल़दै कि
तंऐं किज़ै आसा किअ द!
ताह दैणीं ऐबै तिन्‍नां लै सज़ा अर
ताह करनै तिंयां सदा लै बरैबाद।
6हे बिधाता, मुंह करनअ तेरअ शूकर
किल्हैकि तंऐं हेरी मेरी लेर-पकार शूणीं।
7तूह बिधाता मुंह बच़ाऊंणै आल़अ अर
मुंह करनअ ताह ई प्रैंदै भरोस्सअ।
तंऐं किई मेरी मज़त, मुंह मनाऊंणी खुशी अर
गिहा बोली करनअ मुंह तेरअ शूकर।
8हे बिधाता, तूह दैआ आपणैं लोगा लै बल,
ज़ुंण राज़अ तंऐं आप्पै छ़ांटअ तूह रहा तेऊ बच़ाऊंदअ अर फाज़त करदअ।
9हे बिधाता, ज़ुंण लोग तेरै आपणैं आसा,
तिन्‍नां बच़ाऊ संघा दै तिन्‍नां लै बर्गत।
तिन्‍नें फाज़त कर तूह ई अर
तूह लोल़ी सारी सदा लै तिन्‍नों च़राऊंणै आल़अ फुआल रहअ।

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भज़न 28: OSJ

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