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भज़न 28:7
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
तूह बिधाता मुंह बच़ाऊंणै आल़अ अर मुंह करनअ ताह ई प्रैंदै भरोस्सअ। तंऐं किई मेरी मज़त, मुंह मनाऊंणी खुशी अर गिहा बोली करनअ मुंह तेरअ शूकर।
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भज़न 28:8
हे बिधाता, तूह दैआ आपणैं लोगा लै बल, ज़ुंण राज़अ तंऐं आप्पै छ़ांटअ तूह रहा तेऊ बच़ाऊंदअ अर फाज़त करदअ।
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भज़न 28:6
हे बिधाता, मुंह करनअ तेरअ शूकर किल्हैकि तंऐं हेरी मेरी लेर-पकार शूणीं।
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भज़न 28:9
हे बिधाता, ज़ुंण लोग तेरै आपणैं आसा, तिन्नां बच़ाऊ संघा दै तिन्नां लै बर्गत। तिन्नें फाज़त कर तूह ई अर तूह लोल़ी सारी सदा लै तिन्नों च़राऊंणै आल़अ फुआल रहअ।
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