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भज़न 27

27
ज़ै-ज़ैकार करना लै भज़न
राज़ै दाबेदो भज़न
1बिधाता आसा मेरअ प्रैश्शअ ज़ुंण मुंह बच़ाऊआ।
हुंह निं कोही का डरदअ।
बिधाता करा मेरी फाज़त आप्पै अर
हुंह निं कधि फिकर करदअ।
2कदुष्ट मणछ अर मेरै दुशमण
च़ाऐ मुंह मारदै किल्है निं एछे,
पर तिन्‍नां लागणीं ठोहल़
संघा बधल़णैं तिंयां धरनीं।
3च़ाऐ सारी सैना मुंह फेरा-फेर गोटे,
हुंह निं तैबी बी डरदअ,
तिंयां च़ाऐ मुंह संघै जुध बी छ़ेल़े,
तज़ी बी आसा मेरअ भरोस्सअ बिधाता दी अटल़।
4मंऐं मांगअ बिधाता का एक्‍कै बरदान,
हुंह च़ाहा सिधअ इहअ कि
मुंह रहणअ सारी ज़िन्दगी बिधाते घअरै,
ताकि हुंह तिधी कबल्‍ली बिधाते महान भलाई भाल़ूं
अर बिधाता का हर बगत सलाह मांगूं।
5ज़ेभै मुंह आफ़त पल़े, तेभै हणअ सह मेरअ आसरअ,
तेऊ डाहणअ हुंह आपणैं घअरै राज्ज़ी-राम्बल़अ अर
तेऊ डाहणअ हुंह बडी टोल्हा प्रैंदै बच़ाऊई।
6तेऊ दैणीं मुल्है मेरै सोभी दुशमणा का ज़ीत।
तेखअ मनाऊंणी मुंह बल़ीदान अर ज़ै-ज़ैकार करी तेऊए भबनै खुशी।
मुंह बोल़णीं बिधाते ज़ै-ज़ैकार करना लै गिहा।
7हे बिधाता, ज़ेभै हुंह अरज़ करूं तेभै शूणैं!
मुल्है दैऐ ज़बाब अर मुल्है करै झींण।
8तंऐं आसा आप्पै इहअ बोलअ द, “तम्हैं लोल़ी मेरै दर्शण करदै आऐ।”
मंऐं बोलअ इहअ, “हे बिधाता, मुंह करनै तेरै दर्शण।”
9हे बिधाता, ऐबै निं मुंह बाखा पिठ फरेऊई!
मुल्है निं रोश्श करी, अर
मुंह निं आप्पू का दूर करी।
मेरी मज़त करनै आल़अ आसा सिधअ तूह ई,
मुंह निं शोटी डाही नां कल्ही छ़ाडी आथी, हे बिधाता,
मेरै निं ताह छ़ाडी कोहै आथी ज़ुंण मुंह बच़ाऊई सका।
10मेरै ईजै बाबै बी डाहअ हुंह शोटी,
पर ताह बिधाता करनी मेरी हेर-सभाल़।
11हे बिधाता, तूह खोज़ मुखा, हुंह करूं तिहअ ई ज़िहअ तूह च़ाहा,
मुंह नढैऊ राम्बल़ी बाता
ज़ेथ हुंह मेरै दुशमणा का बच़ी राज्ज़ी-राम्बल़अ रहूं।
12ज़िहअ मेरै दुशमण मुल्है करनअ च़ाहा, तिन्‍नां निं तिहअ करनै दैई,
लोग दैआ मेरै बारै झ़ुठी शाजत अर तिंयां दैआ मुल्है डरैऊंणै आल़ी धमकी।
13पर हे बिधाता, मुंह आसा भरोस्सअ मुंह भाल़णीं तेरी भलाई
ज़िऊंदी ज़िता एऊ ई संसारै। #भज. 142:5
14सबर डाही रहणअ बिधाता न्हैल़ै-भाल़ै लागी।
हैअ विश्वास डाहणअ पाक्‍कअ,
हाँ, सबर डाही रहणअ बिधाता न्हैल़ै-भाल़ै लागी।

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भज़न 27: OSJ

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