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भज़न 27:14
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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सबर डाही रहणअ बिधाता न्हैल़ै-भाल़ै लागी। हैअ विश्वास डाहणअ पाक्कअ, हाँ, सबर डाही रहणअ बिधाता न्हैल़ै-भाल़ै लागी।
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भज़न 27:4
मंऐं मांगअ बिधाता का एक्कै बरदान, हुंह च़ाहा सिधअ इहअ कि मुंह रहणअ सारी ज़िन्दगी बिधाते घअरै, ताकि हुंह तिधी कबल्ली बिधाते महान भलाई भाल़ूं अर बिधाता का हर बगत सलाह मांगूं।
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भज़न 27:1
बिधाता आसा मेरअ प्रैश्शअ ज़ुंण मुंह बच़ाऊआ। हुंह निं कोही का डरदअ। बिधाता करा मेरी फाज़त आप्पै अर हुंह निं कधि फिकर करदअ।
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भज़न 27:13
पर हे बिधाता, मुंह आसा भरोस्सअ मुंह भाल़णीं तेरी भलाई ज़िऊंदी ज़िता एऊ ई संसारै।
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भज़न 27:5
ज़ेभै मुंह आफ़त पल़े, तेभै हणअ सह मेरअ आसरअ, तेऊ डाहणअ हुंह आपणैं घअरै राज्ज़ी-राम्बल़अ अर तेऊ डाहणअ हुंह बडी टोल्हा प्रैंदै बच़ाऊई।
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