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ज्ञैन 9

9
मौत एछणी खिरी सोभी लै
1मंऐं सोठअ इना सोभी गल्‍ले बारै खास्सअ, तेखअ आई मुंह एही समझ़ कि धर्मीं अर अक्ली आल़ै मणछे काम बी आसा बिधाते हाथै, इधी तैणीं कि तिन्‍नों झ़ूरनअ अर ज़ीद डाहणीं बी। हाम्हां लै सका किछ़ बी हई, हाम्हां मांझ़ै निं कोही का थोघ हंदअ कि आजू ज़िन्दगी दी भलअ हणअ कि बूरअ। 2कोही दी निं किछ़ै फरक आथी। सोभिए हआ एक्‍कै ज़ेही दशा, धर्मीं होए च़ाऐ कदुष्ट, भलै अर बूरै, शुचै अर छ़ोतलै, च़ाऐ कुंण बल़ीदान करा या नां करा। भलअ मणछ निं पापी का बढकर आथी, सोह खाणैं आल़अ निं तेऊ का बढकर आथी ज़ुंण सोह निं खांदअ!
3एऊ संसारै आसा अह बेघै बूरअ अर अह निं नसाफ आथी कि सोभी मणछे हआ एक्‍कै दशा। तैही निं लोग भलै करनै बाखा धैन दैंदै। आपणीं ज़िऊंदी ज़िता रहा तिंयां बेगरै ज़िहै बूराई करदै लागी अर खिरी एछा तिन्‍नां लै नच़ानक मौत। 4पर ज़ुंण एऊ संसारै ज़िऊंदअ आसा तेऊ आसा धख आशा बी, किल्हैकि मूंऐं दै सिहा का आसा ज़िऊंदअ कुक्‍कर राम्बल़अ! 5हाम्हां सोभी का आसा थोघ कि एकी धैल़ै लागणअ हाम्हां मरनअ ई, पर मुल्दै का निं किछ़ै थोघ हंदअ अर नां तिन्‍नां किज़ै होर च़ाल्‍लअ भेटी, तिंयां गऐ डेऊई अर नां तिंयां कहा आद रहणैं। 6तिन्‍नों झ़ूरनअ, ज़ीद-मिश बी हुई तिन्‍नां ई संघै खतम। तिंयां निं ऐबै एऊ संसारै किछ़ू गल्‍ला दी साझ़ू हणैं।
7तैही बोला हुंह कि खुश रहा, खाई-पिई रहा राज्ज़ी-मौज़ी! बिधाता बी आसा एता लै राज्ज़ी। 8बधिया झिकल़ै बान्हीं अर मुंडै तेल लाई रहणअ खुश। 9ज़िन्दगी आसा धख ज़ेही, आपणीं लाल़ी लै झ़ूरनअ खास्सै अर तैहा संघै रहणअ राज्ज़ी-मौज़ी। एऊ संसारे बृथा आफ़ता जैंदरी आसा बेटल़ी ई थारी मैन्थो पुआज़अ। 10तम्हां ज़िहअ बी काम करे, तेथ करनी खास्सी मैन्थ। ज़िधा लै तम्हां मरी करै डेऊणअ, तेथ निं तेखअ किछ़ै काम हंदअ, नां सोठ हंदी, नां ज्ञैन, नां थारी अक्ल अर नां थारअ सज़ाण हणैंओ कोई मतलब आथी।
11मंऐं शिखल़ी एऊ संसारै एक होर गल्‍ल बी:
नां खास्सै ठुर्हनै आल़ै कबल्‍लै ज़ितदै
अर नां जुधा लै शूर-बीर कबल्‍लै जुध ज़ितदै,
नां अक्ली आल़ै कबल्‍लै ज़िन्दगी दी सफल हंदै,
नां खास्सै समझ़कार कबल्‍लै सेठ हंदै अर
नां ज़ाण-प्रबीण मणछा कबल्‍ली बडी पदबी भेटदी।
ईंयां हआ सोभै मोक्‍के गल्‍ला अर
खराब किसमत हआ सोभिए।
12मणछा का निं थोघ हंदअ कि तेऊओ बगत केभै एछणअ। ज़िहै च़ेल्‍लू नभैऊशै ज़बाल़ा दी दाभिआ अर ज़ेही म्हाछ़ली ज़ज़ाल़ा दी शाचा, तिहै ई पल़ा मणछ बी नच़ानक आफ़ता दी।
ऐडै का आसा अक्ल भली
13एकी मणछा का भाल़ी मंऐं एऊ संसारै एही अक्ल, तेता भाल़ी हुअ हुंह राज्ज़ी। 14एक होछ़ी ज़ेही नगरी थिई अर तेथ लोग बी थिऐ थोल़ै ई। तैहा नगरी संघै जुधा लै आअ एक बडअ राज़अ आपणीं सैना पाई संघा गोटी सह फेरा-फेर। 15तैहा नगरी रहा त एक दाल़जी मणछ, पर सह थिअ बेघै अक्ली आल़अ अर तेऊ दाल़जी मणछै किई किज़ै एही अक्ल कि तेऊ बच़ाऊई सह नगरी। पर तज़ी बी निं कुंण सह मणछ आद डाहअ। 16तै रहा हुंह इहअ बोल्दअ लागी कि ज़ोरा का राम्बल़ी हआ अक्ल, पर तज़ी बी निं लोग गरीबे अक्लीए बारै सोठदै अर नां तेऊए गल्‍ला दी धैन दैंदै! 17अक्ली आल़ै मणछे सुलै करै बोलै दै बैण हआ सभा दी ज़ोरै-ज़ोरै बोली ऐडी गल्‍ला का राम्बल़ै। 18अक्ल हआ अस्त्र-शस्त्रा का बलबान, पर एक गलती सका थारी सोभी भलाई बरैबाद करी।

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ज्ञैन 9: OSJ

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