2 इतिहास 26
26
यहूदा मुल्खै राज़ै उज़ियाहो राज़
(2 राज़ै 14:21,22; 15:1-7)
1यहूदा मुल्खे सारी परज़ा बणाअं अमास्यो सोल़ा सालो शोहरू उज़ियाह तेऊए ज़ैगा यहूदा मुल्खो राज़अ। 2आपणैं बाब राज़ै अमास्या मरनै बाद छ़ड़ैऊअ उज़ियाह एलात नगरीओ कबज़अ संघा च़िणीं सह नगरी भिई इहअ करै हुई सह नगरी भिई यहूदा मुल्खे।
3ज़धू उज़ियाह राज़अ बणअ, तधू ती तेऊए अमर सोल़ा साल। तेऊ किअ एरुशलेम नगरी का यहूदा मुल्खै बुंजा साला तैणीं राज़। तेऊए ईजा नाअं त जकोल्या अर सह थिई एरुशलेम नगरी का। 4तेऊ किऐ आपणैं बाब अमास्या ज़िहै भलै काम ज़ेता करै बिधाता खुश हआ। 5जकर्या थिअ राज़ै उज़ियाहो सलाहकार अर सह करा त बिधाते बारै तेऊ लै शिक्षा दैई। जकर्ये ज़िऊंदी ज़िता किई उज़ियाह शुचअ-पाक्कअ रही बिधाते च़ाकरी अर बिधाता बी किअ सह सफल।
6उज़ियाह कि पलिश्ती संघै जुध। तेऊ पाई गात, जबनेह अर अशदोद नगरी फेरे दुआली ढोल़ी संघा च़िणीं अशदोद अर पलिश्ती मुल्खै उछ़टै गहल़ा आल़ी नऊंईं नगरी। 7बिधाता किई तेऊए पलिश्ती, गूर-बाल बस्सै दै अरबी अर मुनी लोगा का ज़ितणा लै मज़त। 8अमोनी लोग बी करा तै उज़ियाह लै कारअ दैई। इहअ करै हुअ उज़ियाह खास्सअ बलबान अर सह हुअ मिसर देशा तैणीं खास्सअ मशूर।
9एरुशलेम नगरी च़िणैं उज़ियाह पुंझ़े प्रऊल़ी, नाल़टी बाखा प्रऊल़ी अर तिधी बडै-बडै कोट ज़िधा का नगरीए दुआल भितरा बाखा फिरा। 10यहूदा मुल्खै रेगीस्तानी सऊंऐं मुल्खै डाहै तेऊ कोट च़िणीं अर तेथ डाही सरगे पाणीं कठा करना लै खास्सी कोफरी बणाईं। किल्हैकि तेथ ती तेऊ का खास्सी डागै-चैणें हेल़्ही। सह झ़ूरा त कृषाणी करना लै खास्सअ, तेऊ का थिऐ धारा बाखे मुल्खै खास्सै दाखे बाग ज़ेथ रज़दी-पज़दी ज़ैगा थिई। तेथ कामां करनै आल़ै तै तेऊ खास्सै बेठू डाहै दै लाई।
11उज़ियाह का थिई बडी सैना तेते सोभै दल रहा हर बगत जुधा लै तैर। जेइल थिअ सैना दी काईथ अर तेऊ संघै दुजअ थिअ मासेया। तिन्नां प्रैंदै सैणअ आसा राज़े बज़ीरा मांझ़ै हनन्याह। 12सारी सैना दी थिऐ दूई हज़ार छ़ह शौ दलपति। 13तिन्नां उंधै थिई चअन लाख सात हज़ार पांज़ शौ शूरबीरे सैना ज़ुंण राज़े फाज़त करना लै दुशमणा संघै ज़बरदस्त जुध करनै आल़ै थिऐ। 14राज़ै उज़ियाह किअ सारी सैना लै ढाल़, टोप, कबच, कबाण अर फर्णैक्की लै पात्थरो पुगतअ इंतज़ाम। 15एरुशलेम नगरीए गहल़ा प्रैंदै कोटा दी बणाईं तेऊए ज़ाण-प्रबीण कारीगीरै एही-एही मशीना ज़ेता करै खास्सै कतीर बाही सका तै अर दुआली प्रैंदै पुंडरी अर पुंझ़ा बाखा बडै-बडै पात्थर शोटी सका तै। बिधाता किअ उज़ियाह खास्सअ बलबान अर सारै दी मशूर।
उज़ियाह आअ घमंड
16ज़ांऊं राज़अ उज़ियाह खास्सअ बलबान हुअ, सह हुअ तेखअ घमंडी अर तेता करै हुई तेऊए बरैबादी। सह हुअ इहअ शरेरअ कि सह डेऊअ एकी बारी बिधाते भबनै संघा ज़ाल़अ धूप-बेदी दी आप्पै धूप। इहअ करै चोल़अ तेऊ बिधातो बधान। 17अजर्याह प्रोहत अर तेऊ संघै बिधाते अश्शी प्रोहत बी भितरा लै ज़ुंण शूरबीर बी थिऐ। 18तिंयां लागै राज़ै रोक्कदै अर इहअ बोल्दै, “माहा राज़अ, उज़ियाह! अह हक निं ताल्है आथी कि तूह पबित्र ज़ैगा डेऊई बिधाता लै धूप ज़ाल़े!” एता सका सिधै तिंयां प्रोहत करी ज़ुंण हारणे आद-लुआदा मांझ़ै आसा। तूह निखल़ खास पबित्र ज़ैगा का बागै। अह किअ तंऐं पाप अर ताह निं आजू बिधाता का बर्गत भेटणीं।
19उज़ियाह त हाथै धनैरअ ढाकअ द अर सह हुअ तिन्नां प्रोहता लै रोश्शै लाल-पिंऊंल़अ। सह थिअ बिधाते भबनै खास पबित्र ज़ैगा धूप बेदी सेटा खल़्हुअ द अर हेरा-हेरी निखल़ी तेऊए माथै कोहल़। 20अजर्याह माहा प्रोहत अर होरी प्रोहतै ज़ांऊं तेऊए माथै कोहल़ निखल़दी भाल़ी तिन्नैं काढअ सह छ़ेक्कै-छ़ेक्कै बागा लै। ज़ांऊं उज़ियाह का ज़ाण्हुंअ कि बिधाता दैनी तेऊ लै सज़ा! तेऊ त आप्पू बी बागै निखल़णेंओ छ़ेक्कअ लागअ द।
21उज़ियाह रही सह कोहल़ तधा पोर्ही सारी अमरा अर सह निं बिधाते भबनै एछी सकदअ त किल्हैकि सह थिअ बधाने साबै छ़ोतलअ। सह रहा त आपणैं मैहला भितरी अर यहूदा मुल्खो सारअ राज़-काज़ सभाल़ा त पठी तेऊओ शोहरू जताम।
22राज़ै उज़ियाह आपणैं राज़ा दी ज़िहै बी काम किऐ, तिंयां सोभै गल्ला आसा आमोसे शोहरू ईशायाह गूरै लिखी डाही दी। 23ज़ांऊं उज़ियाह मूंअ, सह डाहअ दाबेदपूर नगरी दाबी। सह निं तिधी दाबअ ज़िधी राज़ै दाबा तै किल्हैकि तेऊ ती कोहल़ निखल़ी दी। तेऊए ज़ैगा बणअ आजू तेऊओ शोहरू जताम यहूदा मुल्खो राज़अ।
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