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भज़न 85:2
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तंऐं किऐ आपणीं परज़े पाप माफ अर तिन्नें गलती बी निं तंऐं आद डाही।
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भज़न 85:10
ऐबै हणैं तेरी झ़ूरी अर सत्त कठा अर भलाई अर मेल़-ज़ोल़ रहणैं एकी-दुजै का मल़्हैछुई।
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भज़न 85:9
ऐबै जाणैं तिंयां बच़ी ज़ुंण तेरी डरा हेठै रहा, तूह बस्सणअ ऐबै आपणीं सारी शोभा संघी हाम्हां संघै।
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भज़न 85:13
बिधाता आजू हांढणअ ऐबै धर्म, ताकि सह तेऊए गंईं बशैल़णा लै बात सरली करे।
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