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भज़न 84:11
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हे बिधाता, म्हारी फाज़त करनै आल़अ महान राज़अ आसा तूह ई, तूह दैआ हाम्हां लै इज़त अर जशे बर्गत। ज़ुंण मणछ धर्मीं ज़िन्दगी ज़िऊआ, तिन्नां लै निं तूह भली च़िज़ा दैणैं का पिछ़ू हटदअ।
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भज़न 84:10
तेरै बसेरै एकी धैल़ै रहणअ आसा हज़ार साला ज़िऊंणै का बित्तअ, कदुष्टे डेरै रहणैं का भलअ आसा मुल्है तेरै दुआरे डेहल़ै बेशी रहणअ भलअ।
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भज़न 84:5
तूह दैआ तिन्नां लै बर्गत ज़ुंण तेरै ज़ोरे आसरै रहा अर ज़ुंण मणछ असली दी दिला का तेरै बसेरै लै एछणअ च़ाहा।
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भज़न 84:2
हुंह च़ाहा दिला का तेरै बसेरै दी पुजणअ! हुंह आसा तन-मन्न लाई ताह ज़िऊंदै परमेशर बिधाते खुशी-खुशी गिहा बोल्दअ लागअ द।
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