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भज़न 86:11
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे बिधाता, मुखा खोज़ आपणअ सत्त, मुंह करनअ तिहअ ई ज़िहअ तूह बोले, तूह कर मेरै दिला शुचै ताकि हुंह सदा तेरअ अदर करूं।
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भज़न 86:5
तूह आसा हाम्हां लै भलअ अर तूह करा हाम्हां माफ, ज़ुंण ताखा अरज़ करा, तिन्नां लै झ़ूरा तूह खास्सअ।
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भज़न 86:15
पर हे मेरै मालक, तूह आसा हाम्हां लै जश दैणैं आल़अ अर झणैल़ू परमेशर, तूह निं छ़ेक्कै रोश्श करदअ अर एतो सका हाम्हैं निहंचअ डाही कि तूह झ़ूरा हाम्हां लै खास्सअ।
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भज़न 86:12
हे मेरै मालक, हुंह करा दिला का तेरअ शूकर, मुंह रहणअ कबल्लै खोज़दै लागी कि तूह किहअ महान आसा।
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भज़न 86:7
ज़ेभै मुंह आफ़त पल़ा तेभै करा हुंह ताह ई सेटा अरज़, किल्हैकि मुखा आसा थोघ कि तूह हेरा शूणीं।
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