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भज़न 70:4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
ज़ुंण तेरै भगत आसा, तिंयां लोल़ी ताह करै खुश अर मगन हुऐ। ज़ुंण तेरै उद्धार करना लै शूकर करा तिन्नैं लोल़ी ती कबल्ली एही गल्ला बोली, “बिधाता भाल़ किहअ महान आसा।”
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भज़न 70:5
हुंह आसा दुखी-गरीब, पर तूह बिधाता डाहा मेरअ धैन-खैल। मुंह छ़ड़ैऊंणैं आल़अ आसा तूह ई। ज़ीबाण, ऐबै निं मुंह बच़ाऊंणा लै बल़ैग पाई।
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भज़न 70:1
हे बिधाता, तूह कर छ़ेक्कै मेरी मज़त! ज़ीबाण, मुंह बच़ाऊ।
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