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भज़न 69:30
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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मुंह करनी गिह गांठी ज़ै-ज़ैकार, अर तेरअ शूकर करी करनी मुंह तेरी बड़ैई।
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भज़न 69:13
पर बिधाता, हुंह करा ताह सेटा अरज़, ज़िहअ ताह ठीक लागा तेभै दैऐ तूह एतो ज़बाब। ताह हुअ ज़बाब दैणअ किल्हैकि तूह झ़ूरा खास्सअ, अर तंऐं आसा ज़बान दैनी दी कि ताह हेरनअ हुंह बच़ाऊई।
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भज़न 69:16
हे बिधाता, तूह दै मुल्है ज़बाब, तूह आसा भलअ अर तूह करा झींण। मुंह बाख दै धैन! तूह आसा खास्सअ झणैल़ू।
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भज़न 69:33
बिधाता शूणां रैनै-गरीबे लेर-पकार, आपणीं परज़ा निं सह कैद खानै बिस्सरी डाहंदअ।
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