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भज़न 70

70
बिधाता का मज़त मांगणा लै अरज़
(भज़न 40:13-17)
गाज़ै-बाज़ै आल़ेए सैणैं लै राज़ै दाबेदे पिछ़ली गल्‍ला आद फरेऊंणा लै गिह
1हे बिधाता, तूह कर छ़ेक्‍कै मेरी मज़त!
ज़ीबाण, मुंह बच़ाऊ।
2ज़ुंण मुंह मारना लै पिछ़ू आसा पल़ै दै,
तिंयां लोल़ी झाखुऐ अर हारै।
ज़ुंण मुल्है आफ़त पाणा लै झ़ूरा,
तिंयां लोल़ी पिछ़ू हटै अर बेइज़त हुऐ।
3ज़ुंण दुशमण मेरअ सुहांग करा,
तिंयां लोल़ी आपणीं हार भाल़ी शर्मिंदै हुऐ।
4ज़ुंण तेरै भगत आसा, तिंयां लोल़ी ताह करै खुश अर मगन हुऐ।
ज़ुंण तेरै उद्धार करना लै शूकर करा
तिन्‍नैं लोल़ी ती कबल्‍ली एही गल्‍ला बोली,
“बिधाता भाल़ किहअ महान आसा।”
5हुंह आसा दुखी-गरीब,
पर तूह बिधाता डाहा मेरअ धैन-खैल।
मुंह छ़ड़ैऊंणैं आल़अ आसा तूह ई।
ज़ीबाण, ऐबै निं मुंह बच़ाऊंणा लै बल़ैग पाई।

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भज़न 70: OSJ

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