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भज़न 42:11
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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इहअ किल्है चुटअ मेरअ हैअ? मुंह किल्है निस्सअ उझ़ुई नां बेशी राम हई? मुंह डाहणअ परमेशरा दी भरोस्सअ, मुंह लणअ त एकी बारी भिई परमेशरा सेटा डेऊई आपणैं उद्धार करनै आल़ै परमेशरो शूकर करी।
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भज़न 42:1-2
हे बिधाता, ज़ेही हरनी गाडे पाणीं झुटणा लै फहुंकिआ, तिहअ फहुंकिआ हुंह ताल्है। हे परमेशर, मुंह आसा ताह ज़िऊंदै परमेशरे एही चिश कि ताह सेटा हुंह केभै पुजूं!
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भज़न 42:5
इहअ किल्है चुटअ मेरअ हैअ? मुंह किल्है निस्सअ उझ़ुई नां बेशी राम हई? मुंह डाहणअ परमेशरा दी भरोस्सअ, मुंह लणअ त एकी बारी भिई परमेशरा सेटा डेऊई मेरै उद्धार करनै आल़ै परमेशरो शूकर करी।
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भज़न 42:3
हे परमेशर, राच-धैल़ लेरी-लेरी आसा आशू ई मेरी बैल़ी-क्लारी, सोभै हआ मुंह इहअ पुछ़दै लागै दै, “तेरअ परमेशर आसा किधी?”
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भज़न 42:6-7
हे परमेशर, मंऐं हेरअ पठी हैअ चोल़ी, हुंह लागा तेरै बारै सोठदअ, तंऐं पाई मेरै दिलै दुखे बडी-बडी छ़ाल्ली, मुल्है पल़अ आई दी गाडा ज़िहअ झाख, सह ज़ाण्हिंआं हर्मोन अर मिसगार धारा का लागै दै जरदण नदीए छ़ोआ ज़िहअ क्रुंगा लांदअ।
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