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भज़न 43:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
इहअ किल्है चुटअ मेरअ हैअ? मुंह किल्है निस्सअ उझ़ुई नां बेशी राम हई? मुंह डाहणअ परमेशरा दी भरोस्सअ, मुंह लणअ त एकी बारी भिई परमेशरा सेटा डेऊई आपणैं उद्धार करनै आल़ै परमेशरो शूकर करी।
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भज़न 43:3
तूह छ़ाड मुल्है आपणअ सत्त अर प्रैश्शअ, ताकि तेते ज़ोरै हुंह तेरै पबित्र पर्बत सियोन अर तेरै भबनै पुजी सकूं ज़िधी तूह रहा।
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भज़न 43:1
हे परमेशर, मेरअ नसाफ कर, तूह लल़ मेरअ दाऊअ इना पापी संघै आप्पी, इना कदुष्ट अर कपटी मणछा का बच़ाऊ मुंह।
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