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भज़न 23:4
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
ज़ै हुंह नटिप्प न्हैरै बाती बी हांढे, हुंह निं तेथ बी डरदअ किल्हैकि तूह बिधाता हआ मुंह संघा। तेरी कुंगल़ी चुंडीए शोठी करा मेरी फाज़त।
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भज़न 23:1
हे बिधाता, तूह आसा मेरअ फुआल, तूह करा मेरी हर गरज़ पूरी।
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भज़न 23:6
अह गल्ल आसा पाक्की कि तूह झ़ूरा मुल्है अर ताह करनी मुल्है सदा झींण, हे बिधाता, मुंह बस्सणअ तेरै घअरै सदा-सदा लै।
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भज़न 23:2-3
तूह च़राऊआ मुंह हरै घाहे घैहणीं दी, तूह निंयां मुंह ज़ाईरू पाणींए छ़ोआ नेल़ अर तूह दैआ मेरअ शाह हरअ फरेऊई। तूह नढैऊआ मुंह धर्मीं बाता ज़िहअ सह बोला तिहअ ई।
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