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भज़न 22:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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हे मेरै परमेशर, हे मेरै परमेशर, तंऐं किल्है छ़ाडअ हुंह? तूह मेरी लेर-पकार किल्है निस्सअ शूणीं अर मेरी मज़त किल्है निस्सअ करी? तूह मुंह किल्है निस्सअ बच़ाऊई?
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भज़न 22:5
तिंयां करा तै ताह सेटा अरज़ अर तूह हेरा त तिन्नां आफ़ता का बच़ाऊई, तिंयां करा तै तेरअ ई भरोस्सअ अर तिन्नां निं कधि उंधै हुई गई।
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भज़न 22:27-28
हे बिधाता, पृथूई दी करनी दूर-दूर देशे लोगा तेरी आद। ताह सेटा एछणैं लोग संसारे सोभी ज़ैगा का अर हर रंगे लोगा टेक्कणअ ताह सेटा माथअ। किल्हैकि तूह बिधाता आसा राज़अ अर तूह करा संसारे सोभी देशा प्रैंदै राज़।
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भज़न 22:18
तिन्नैं किऐ मेरै झिकल़े लीरा-कच़ीरा संघा बांडै मेरै झिकल़ै आप्पू मांझ़ै परच़ी पाई।
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भज़न 22:31
ज़ुंण मणछ अज़ी संसारै आजू पैईदा हणैं तिन्नां का डाहणीं तिन्नें ईजा बाबा एही गल्ला खोज़ी, “हाम्हैं आसा बिधाता बच़ाऊऐ दै।”
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