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भज़न 105:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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बिधातो करा शूकर अर सोभी का खोज़ा कि सह किहअ महान आसा, देशा-देशे लोगा का खोज़ा कि तेऊ किज़ै-किज़ै आसा किअ द।
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भज़न 105:4
मज़त मांगा बिधाता का, कबल्लै रहणअ तेऊए ज़ै-ज़ैकार करदै लागी।
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भज़न 105:3
खुश हआ कि हाम्हैं आसा तेऊ बिधाते, तेऊए सोभै भगत रहा नंद।
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भज़न 105:2
बिधाते ज़ै-ज़ैकार करना लै बोला गिहा! तेऊ ज़ुंण महान नुआहरै काम किऐ, तेता खोज़ा सोभी का।
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