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भज़न 105

105
बिधाता आसा शुचअ-पाक्‍कअ
(1 इतिहास 16:8-22)
1बिधातो करा शूकर अर
सोभी का खोज़ा कि सह किहअ महान आसा,
देशा-देशे लोगा का खोज़ा कि तेऊ किज़ै-किज़ै आसा किअ द।
2बिधाते ज़ै-ज़ैकार करना लै बोला गिहा!
तेऊ ज़ुंण महान नुआहरै काम किऐ, तेता खोज़ा सोभी का।
3खुश हआ कि हाम्हैं आसा तेऊ बिधाते,
तेऊए सोभै भगत रहा नंद।
4मज़त मांगा बिधाता का,
कबल्‍लै रहणअ तेऊए ज़ै-ज़ैकार करदै लागी।
5-6आबरामे लुआद, तम्हैं ज़ुंण तेऊए च़ाकरी करा,
याकबे लुआद, ज़ुंण तेऊ छ़ांटै दै आसा,
तम्हैं करा तिन्‍नां च़मत्कारा आद ज़ुंण तेऊ रहैऊऐ,
तेता बी करा आद ज़ुंण तेऊ नसाफ किअ।
7सह बिधाता ई आसा म्हारअ परमेशर,
तेऊओ नसाफ आसा सारै संसारा लै।
8सह डाहा आपणीं करार सदा लै अटल़,
ज़ुंण तेऊ ज़बान दैनी, सह रहा हज़ारो पोस्ती तैणीं।
9ज़ुंण करार तेऊ आबराम, इसहाका संघै किई अर
ज़ुंण ज़बान तेऊ याकबा लै दैनी सह आसा अटल़।
10बिधाता दैनअ याकबे आद-लुआदा लै बधान,
तेऊ किई इज़राईली संघै अटल़ करार।
11तेऊ बोलअ त इहअ, “मुंह दैणीं तम्हां लै कनान देशे ज़ैगा,
तैहा ज़ैगे मालक हणैं तम्हैं सदा लै।”
12तधू तै तिंयां परमेशरे लोग धख ज़िहै मणछ,
अर कनान देशै तै तिंयां पाखलै।
13तिंयां रहा तै देशै-देशै हांढदै लागी,
एकी मुल्खा का दुजै मुल्खै।
14पर बिधाता निं तिन्‍नां कोही मणछा हंतणैं दैनअ,
तिन्‍नें फाज़त करना लै नैरा त बिधाता राज़ै इहअ बोली,
15“मेरी छ़ांटी दी परज़ा निं छ़ुंहीं छ़ेल़ी आथी,
नां मेरै गूर-पज़ैरै लै हान्‍नी करी।”
16तेखअ छ़ाडअ बिधाता तेऊ देशा लै नकाल़ अर
तेऊ देशा का किअ नाज़-पाणीं दूर।
17पर तेऊ छ़ाडअ युसुफ नाओं मणछ तिन्‍नां का आजू ज़ुंण
गलाम हणां लै बेच़ी पाअ त।
18सह डाहअ शांघल़ी दी बान्हीं,
हाथै, खूरै अर गल़ा का थिअ सह लोहे कल़ोलै करै बान्हअ द।
19सह रहअ तेभै तैणीं गलाम कैदी, ज़ेभै तैणीं तेऊए आप्पै बोली दी गल्‍ला पूरी निं हुई,
बिधाता परखअ सह राम्बल़ै करै कि सह आसा भलअ।
20मिसर देशे राज़ै छ़ाडै तेऊ सेटा आपणैं दूत,
संघा किअ सह आज़ाद।
21राज़ै बणाअं युसुफ सारै देशा प्रैंदै मालक,
तेऊ लै दैनअ सारै मिसर देशो राज़।
22सारै बज़ीर अर कार करिंदै प्रैंदै हक बी दैनअ तेऊ लै,
सोभी बज़ीरा प्रैंदै सैणअ बी बणाअं सह कि सह तिन्‍नां लै सलाह दैए।
23पिछ़ू पजैल़अ बिधाता याकब बी मिसर देशै,
संघा बस्सअ इज़राईल तेऊ देशै परदेसी ज़िहअ।
24बिधाता दैनी तिन्‍नां लै खास्सी बर्गत अर तिन्‍नें हुई खास्सी आद-लुआद,
तिंयां हुऐ खास्सै अर तिन्‍नें दुशमणा का खास्सै बलबान।
25बिधाता किहअ इहअ कि मिसरी लोग लागै तेऊए परज़ा संघै ज़ीद डाहंदै,
तिंयां लागै बिधाते च़ाकरी करनै आल़ै संघै छ़ल़-कपट करदै।
26तेखअ छ़ाडै बिधाता मोसा अर हारण
ज़ुंण बिधाता छ़ांटै दै थिऐ।
27तिन्‍नैं किऐ मिसरी लोगा जैंदरी डेऊई बडै नुआहरै-नुआहरै काम,
अर तिन्‍नैं रहैऊऐ तिधी बिधाते कई च़मत्कार।
28बिधाता छ़ाडअ तेऊ देशा लै घोर न्हैरअ,
पर मिसरी लोग निस्सै तज़ी बी बिधाते गल्‍ला मनी।
29परमेशरै किई तेऊ देशे पाणींए गाडा नाल़ी बी लोहू आल़ी अर
म्हाछ़ली मूंईं पठी।
30सारअ देश भरअ मिंडकै करै,
राज़े मैहलै बी भर्हुऐ मिंडकै।
31ज़ांऊं परमेशरै हुकम किअ सारअ देश भर्हुअ डगैछै करै,
अर सारै देशै पल़ी कतूआ।
32बिधाता बरशाऊऐ पाणींए बदल़ै तिन्‍नां लै सारै देशै बडै-बडै शरू,
ज़ैगै-ज़ैगै पल़ी तिन्‍नां लै बीज।
33बिधाता किऐ तिन्‍नें फेडू अर दाखे बाग बरैबाद,
सारै देशै पाऐ डाल़-बूट चोल़ी।
34ज़ांऊं तेऊ हुकम किअ, सारअ देश भर्हुअ रैट्टै करै,
तिन्‍नां किल़ै निं कुंण गणी सकदअ त।
35तिन्‍नैं रैट्टै कोक्‍करी सारै डाल़-बूट,
नाज़ अर सारी साल-फसल।
36खिरी पाऐ परमेशरै मिसर देशे सारै मारी,
मिसरीओ निं एक घअर बी छ़ुटअ ज़ेथ ज़ेठअ निं मूंअ।
37तेखअ किऐ बिधाता इज़राईली मिसर देशे गलामी का आज़ाद,
तिन्‍नैं निंयं आप्पू संघै खास्सअ सुन्‍नअ-च़ंदी बी,
तिंयां थिऐ सोभै ज़ण्हैं ताज़ै-नरोगै।
38इज़राईली मिसर देशा का डेऊंदै भाल़ी हुऐ मिसरी लोग खुश,
किल्हैकि तिन्‍नें दिलै ती इज़राईलीए डअर पल़ी दी।
39धैल़ी डाहा त बिधाता इज़राईली आजू-आजू प्रैंदै बादल़ अर
राची हांढणा लै डाह त तिन्‍नां लै बडअ आगीओ कूंड ताकि तिन्‍नां लै प्रैश्शअ होए।
40ज़ांऊं इज़राईली पकार पाई, परमेशरै दैनी तिन्‍नां लै समुंदरी होछ़ै-होछ़ै च़ेल्‍लूए शिखा अर
तेऊ रज़ैऊऐ तिंयां स्वर्गा का खाण दैई करै।
41बिधाता काढअ तिन्‍नां लै शुक्‍की टोल्हा का पाणीं,
तेते लागी शुक्‍कै रेगीस्तानै गाड बगदी।
42परमेशरै डाही आपणीं पबित्र करार आद
ज़ुंण तेऊ आपणैं दास आबरामा संघै थिई किई दी।
43तेऊ नढैऊई आपणीं छ़ांटी दी परज़ा आजू आप्पै,
इज़राईली निखल़ै गिहा अर ज़ै-ज़ैकार करदी गलामी का दूर।
44ज़ेऊ देशै पराई ज़ातीए लोग तै बस्सै दै, सह ज़ैगा दैनी तेऊ इज़राईली लै,
तेऊ दैनअ तिन्‍नां तैहा ज़ैगा पठी गिम्मणै।
45तेऊ किअ इहअ तै कि तिंयां तेऊए बधाने साबै आपणीं ज़िन्दगी ज़िऊए अर
तेऊए सोभै हुकम आपणैं दिलै आद डाहे।
बिधाते लोल़ी सदा ज़ै-ज़ैकार हुई।

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भज़न 105: OSJ

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