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भज़न 104:34
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तूह लोल़ी त मेरी सोठ अर गिहा करै खुश हुअ, किल्हैकि मुल्है खुशी एछा ताखा ई।
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भज़न 104:33
हे बिधाता, मुंह बोल़णीं सारी अमरा तेरी ज़ै-ज़ैकारे गिहा, ज़ेभै तैणीं हुंह ज़िऊंदअ रहे, तेभै तैणीं रहणअ मुंह तेरै भज़न बोल्दै लागी।
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भज़न 104:1
ए मेरै मन्नां बिधाते ज़ै-ज़ैकार कर, हे बिधाता, मेरै परमेशर, तूह भाल़ किहअ महान आसा! तंऐं आसा महान राज़ अर प्रतप्पे झिकल़ै बान्हैं दै।
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