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भज़न 106:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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बिधाते ज़ै-ज़ैकार, तेऊओ करा शूकर, किल्हैकि सह आसा भलअ अर सह झ़ूरा हाम्हां लै सदा।
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भज़न 106:3
बिधाता दैआ तिन्नां लै बर्गत ज़ुंण शुचै आसा अर ज़ुंण सदा भलै काम करा।
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भज़न 106:4-5
हे बिधाता, ज़ेभै तूह आपणीं परज़े मज़त करे, तेभै निं मुंह बिस्सरी पाई, तिन्नां संघै बच़ाऊऐ तूह मुंह बी। ताकि हुंह तेरै छ़ांटै दै मणछा सफल हंदै भाल़ी सकूं, संघा हुंह बी तिन्नें खुशी दी साझ़ू हई हऊं अर तेरी आपणीं परज़ा संघै हुंह बी तेरी बड़ैई करूं।
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