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मूल़ 1:26-27
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तेखअ बोलअ बिधाता इहअ, “ऐबै बणाणैं हाम्हां मणछ आपणैं रुपै आप्पू ज़िहै। ताकि तिंयां समुंदरे सारी म्हाछ़ली, सरगै डेऊणैं आल़ै सोभी च़ेल्लू-पखीरू, घरेलू डागै-चैणैं, पृथूई अर तेथ दी हांढणै-फिरनैं आल़ै ज़ीबा आपणैं काबू दी डाहे।” तेखअ बणाऐं बिधाता मणछ आपणैं रुपै आप्पू ज़िहै, तिंयां बणाऐं बिधाता मर्ध अर बेटल़ी दूई रुपै।
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मूल़ 1:28
बिधाता दैनी तिन्नां लै बर्गत, संघा बोलअ तिन्नां लै इहअ, “फल़ा-फूला संघा भर्हिया सारी पृथूई दी अर समुंदरे म्हाछ़ली, सरगे च़ेल्लू-पखीरू, ज़ुंण ज़ीब धरती दी हांढा-फिरा तिन्नां करा आपणैं काबू तेथ दी आसा थारअ हक।”
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मूल़ 1:1
सोभी का आजी बणाअं बिधाता सारअ भ्रमंड।
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मूल़ 1:2
तधू थिई धरती पठी शुन्नीं, डुघै पाणीं प्रैंदै रहा त न्हैरअ अर पाणीं प्रैंदै रहा त बिधातो शाह बगदअ लागी।
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मूल़ 1:3
तेखअ बोलअ बिधाता, “प्रैश्शअ हअ,” संघा हुअ प्रैश्शअ।
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मूल़ 1:31
तेखअ भाल़ी बिधाता तिंयां सोभै गल्ला ज़ुंण तेऊ बणाईं ती। बिधाता भाल़ी कि तिंयां सोभै गल्ला अर तेता भाल़ी हुअ सह खुश। संघा पल़ी सान्ह, तेखअ भैई राच, इहअ करै हुई छ़हुई धैल़ी।
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मूल़ 1:4
तेऊ प्रैश्शै भाल़ी हुअ बिधाता खुश। संघा किअ बिधाता प्रैश्शअ न्हैरै का ज़ुदअ।
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मूल़ 1:29
तेखअ बोलअ बिधाता तिन्नां लै, “शूणां, ऐहा सारी धरती अर
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मूल़ 1:5
प्रैश्शै लै बोलअ बिधाता धैल़ी अर न्हैरै लै बोलअ राच। तधू पल़ी पैहली बारी सान्ह संघा भैई राच।
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मूल़ 1:6
प्रैश्शै करनै का बाद बोलअ बिधाता, “पाणीं मांझ़ै लोल़ी इहअ फरक हुअ कि पाणीं लोल़ी दूई बाखा लै बांढुअ।”
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मूल़ 1:30
ज़ेतरै धरती दी हांढदै-फिरदै ज़िऊंदै ज़ीब अर च़ेल्लू-पखीरू आसा तिन्नें खाणां लै आसा पृथूई दी सोभै होछ़ै-होछ़ै हरै-हरै डाल़-बूट।” ज़िहअ बिधाता बोलअ सह हुअ तिहअ ई।
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मूल़ 1:14
तेखअ बोलअ बिधाता, “राची का धैल़ी ज़ुदी करना लै लोल़ी सरगै ज़ोती हुई, अर तिंयां नछ़ैण लोल़ी धैल़ी अर साले साबै हुऐ
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मूल़ 1:11
तेखअ बोलअ बिधाता, “धरती दी लोल़ी हरअ घाह अर बेज़ै आल़ेए होछ़ै-होछ़ै डाल़ बूट लागै, संघा लोल़ी धरती दी फल़ा दैणैं आल़ै हरेकी ज़ातीए बूट बी लोल़ी धरती दी टिप्पै।” ज़िहअ बिधाता बोलअ त, सह हुअ तिहअ ई।
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मूल़ 1:7
तेखअ बांडअ बिधाता पाणीं इहअ कि पाणीं किअ उंधै अर उझै दूई बाखा लै, सह हुअ तिहअ ई ज़िहअ बिधाता बोलअ त।
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15
मूल़ 1:12
इहअ करै टिप्पै सारी धरती दी हरअ घाह, भांती-भांतीए ज़ातीए होछ़ै-होछ़ै डाल़-बूट अर हरेक रंगे डाल़-बूट ज़ेतो बेज़अ तिन्नां ई दी हआ लागअ द। आपणैं इना कामां भाल़ी हुअ बिधाता खुश।
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मूल़ 1:16
तेखअ बणाईं बिधाता दूई ज़ोती, इना मांझ़ै खास्सै प्रैश्शै दैणैं आल़ी ज़ोती लै दैनअ धैल़ी लै काम, अर धुंमधुंमै प्रैश्शै दैणैं आल़ी ज़ोती लै दैनअ राची लै काम। संघा बणाऐं बिधाता कई भांतीए तारै बी।
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मूल़ 1:9-10
तेखअ बोलअ बिधाता, “सरगा हेठो पाणीं लोल़ी एकी ज़ैगा कठा हुअ, संघा लोल़ी शुक्की ज़िम्मीं शुझुई, ज़िहअ बिधाता बोलअ, सह हुअ तिहअ ई।” बिधाता बोलअ शुक्की ज़ैगा लै धरती, ज़ुंण पाणीं कठा हुअ तेऊ लै बोलअ तेऊ समुंदर। आपणैं इना कामां भाल़ी हुअ बिधाता खुश।
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मूल़ 1:22
बिधाता दैनी तिन्नां लै इहअ बोली बर्गत, “फूला-फल़ा, अर समुंदरे पाणीं दी भर्हिया सारै दी, अर च़ेल्लू-पखीरू भर्हिया पृथूई दी।”
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मूल़ 1:24
तेखअ बोलअ बिधाता, “धरती का लोल़ी हरेकी ज़ातीए, ज़िऊंदै ज़ीब, मतलब घरेलू डागै-चैणैं, अर धरती दी हांढणै-फिरनैं आल़ै ज़ीब, अर बणें ज़ीब लोल़ी हरेकी ज़ातीए साबै पैईदा हुऐ।” ज़िहअ बिधाता बोलअ त, सह हुअ तिहअ ई।
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मूल़ 1:20
तेखअ बोलअ बिधाता, “पाणीं लोल़ी ज़िऊंदै ज़ीबा करै भरी हुअ, अर च़ेल्लू-पखीरू लोल़ी धरती उझै सरगै उडै।”
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मूल़ 1:25
इहअ करै बणाऐं बिधाता धरती दी हरेकी ज़ातीए ज़िऊंदै ज़ीब, मतलब घरेलू डागै-चैणैं, अर धरती दी हांढणै-फिरनैं आल़ै ज़ीब अर हरेकी ज़ातीए बणें ज़ीब। आपणैं इना कामां भाल़ी हुअ बिधाता खुश।
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