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मूल़ 2:24
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
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तैही रहणअ मर्ध आपणैं ईजा-बाबा छ़ाडी आपणीं लाल़ी संघै मिली अर तिंयां दुहै हणैं एक देही।
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मूल़ 2:18
तेखअ सोठअ बिधाता इहअ, “आदमीओ एक्कै रहणअ निं ठीक आथी, मुंह बणाणअं एऊ लै इहअ साथी ज़ुंण एऊ संघै ढब्बे।”
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मूल़ 2:7
तेखअ बणाअं परमेशर बिधाता धरतीए माट्टै करै आदमी। संघा पाअ तेऊए नाके ढुंण्हीं दी ज़िऊंणेंओ शाह, तिहअ करै हुअ सह ज़िऊंदअ मणछ।
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मूल़ 2:23
तैहा भाल़ी बोलअ तेऊ आदमी, “अह आसा बै मुंह ई ज़ेही, अह आसा मेरी देहीओ भाग अर मेरअ आपणअ हाड-मास्स। मुंह डाहणअ ऐहा नाअं बेटल़ी।”
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मूल़ 2:3
बिधाता दैनी सातुऐ धैल़ै लै बर्गत, सह धैल़ी डाही शुची धैल़ी किल्हैकि ऐहा धैल़ी मुक्कअ त बिधाता भ्रमंडे सोभी गल्ला बणाईं संघा किअ तेऊ बशैघ।
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मूल़ 2:25
आदमी अर तेऊए लाल़ी रहा तै दुहै नांगै पर तिन्नां नांईं ती ऐहा गल्ले शरम लागदी।
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