जिहां पवित्र सास्त्रा मन्झ लिखिरा,
“परमेसरा री नजरा मन्झ कोई धर्मी माह्णुं नी आ,
एक भी धर्मी माह्णुं नी आ।
कोई माह्णुं समझ्दार नी आ,
होर कोई भी माह्णुं परमेसरा जो जाणना नी चाहन्दा।
सब माह्णुं परमेसरा ले दूर हुई गईरे,
सभी रे सभ निकम्मे हुई गईरे,
कोई भी खरे काम करणे वाल़ा नी आ, एक भी नी आ।”