2 कुरिन्थियन 4:16-17

2 कुरिन्थियन 4:16-17 BAG

एहिन से हम पंचे हिम्मत नहीं हारी; जबकि हमार पंचन के देंह कमजोर होत जात ही, तऊ हमार पंचन के अन्तर आत्मा हरेक दिन नई होत जात ही। काहेकि हमार पंचन के पल भर के छोट-छोट दुख, हमहीं पंचन काहीं हमेसा के खातिर अनन्त महिमा देबाबत हें।

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2 कुरिन्थियन 4:16-17 - एहिन से हम पंचे हिम्मत नहीं हारी; जबकि हमार पंचन के देंह कमजोर होत जात ही, तऊ हमार पंचन के अन्तर आत्मा हरेक दिन नई होत जात ही। काहेकि हमार पंचन के पल भर के छोट-छोट दुख, हमहीं पंचन काहीं हमेसा के खातिर अनन्त महिमा देबाबत हें।2 कुरिन्थियन 4:16-17 - एहिन से हम पंचे हिम्मत नहीं हारी; जबकि हमार पंचन के देंह कमजोर होत जात ही, तऊ हमार पंचन के अन्तर आत्मा हरेक दिन नई होत जात ही। काहेकि हमार पंचन के पल भर के छोट-छोट दुख, हमहीं पंचन काहीं हमेसा के खातिर अनन्त महिमा देबाबत हें।2 कुरिन्थियन 4:16-17 - एहिन से हम पंचे हिम्मत नहीं हारी; जबकि हमार पंचन के देंह कमजोर होत जात ही, तऊ हमार पंचन के अन्तर आत्मा हरेक दिन नई होत जात ही। काहेकि हमार पंचन के पल भर के छोट-छोट दुख, हमहीं पंचन काहीं हमेसा के खातिर अनन्त महिमा देबाबत हें।2 कुरिन्थियन 4:16-17 - एहिन से हम पंचे हिम्मत नहीं हारी; जबकि हमार पंचन के देंह कमजोर होत जात ही, तऊ हमार पंचन के अन्तर आत्मा हरेक दिन नई होत जात ही। काहेकि हमार पंचन के पल भर के छोट-छोट दुख, हमहीं पंचन काहीं हमेसा के खातिर अनन्त महिमा देबाबत हें।2 कुरिन्थियन 4:16-17 - एहिन से हम पंचे हिम्मत नहीं हारी; जबकि हमार पंचन के देंह कमजोर होत जात ही, तऊ हमार पंचन के अन्तर आत्मा हरेक दिन नई होत जात ही। काहेकि हमार पंचन के पल भर के छोट-छोट दुख, हमहीं पंचन काहीं हमेसा के खातिर अनन्त महिमा देबाबत हें।