YouVersion Logo
Search Icon

ज़बूर 96

96
दुनिया का ख़ालिक़ और मुंसिफ़
1रब की तमजीद में नया गीत गाओ, ऐ पूरी दुनिया, रब की मद्हसराई करो।
2रब की तमजीद में गीत गाओ, उसके नाम की सताइश करो, रोज़ बरोज़ उस की नजात की ख़ुशख़बरी सुनाओ।
3क़ौमों में उसका जलाल और तमाम उम्मतों में उसके अजायब बयान करो।
4क्योंकि रब अज़ीम और सताइश के बहुत लायक़ है। वह तमाम माबूदों से महीब है।
5क्योंकि दीगर क़ौमों के तमाम माबूद बुत ही हैं जबकि रब ने आसमान को बनाया।
6उसके हुज़ूर शानो-शौकत, उसके मक़दिस में क़ुदरत और जलाल है।
7ऐ क़ौमों के क़बीलो, रब की तमजीद करो, रब के जलाल और क़ुदरत की सताइश करो।
8रब के नाम को जलाल दो। क़ुरबानी लेकर उस की बारगाहों में दाख़िल हो जाओ।
9मुक़द्दस लिबास से आरास्ता होकर रब को सिजदा करो। पूरी दुनिया उसके सामने लरज़ उठे।
10क़ौमों में एलान करो, “रब ही बादशाह है! यक़ीनन दुनिया मज़बूती से क़ायम है और नहीं डगमगाएगी। वह इनसाफ़ से क़ौमों की अदालत करेगा।”
11आसमान ख़ुश हो, ज़मीन जशन मनाए! समुंदर और जो कुछ उसमें है ख़ुशी से गरज उठे।
12मैदान और जो कुछ उसमें है बाग़ बाग़ हो। फिर जंगल के दरख़्त शादियाना बजाएंगे।
13वह रब के सामने शादियाना बजाएंगे, क्योंकि वह आ रहा है, वह दुनिया की अदालत करने आ रहा है। वह इनसाफ़ से दुनिया की अदालत करेगा और अपनी सदाक़त से अक़वाम का फ़ैसला करेगा।

Currently Selected:

ज़बूर 96: DGV

Highlight

Share

Compare

Copy

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in

Video for ज़बूर 96