Bible App logo
Search Icon

भज़न 61

61
आपणीं फाज़त लै अरज़
गाज़ै-बाज़ै आल़ेए सैणैं लै तारा आल़ै बाज़ै दी राज़ै दाबेदो भज़न
1हे परमेशर, मेरी पकार शुण,
मंऐं किई ताह सेटा अरज़, तूह दै तेतो ज़बाब!
2मुखा निं ऐबै आशा ई शुझदी,
हुंह मांगा ताखा आपणैं देशा का दूर रही लेर-पकार पाई मज़त।
तूह बशैल़ मुंह तैहा बडी टोल्हा पिछ़ू ज़ेथ हुंह शरण लई सके।
3मेरी शरण लणें ज़ैगा आसा तूह ई,
मेरै दुशमणा का बच़णा लै उछ़टअ कोट बी आसा तूह ई।
4मुंह दै आपणीं पबित्र ज़ैगा जुगै-जुगै तैणीं रहणैं,
मुंह दै आपणैं फैंखा हेठै शरण लणैं।
5हे परमेशर तंऐं शूणीं मेरी मानता,
तंऐं दैनअ मुल्है तिहअ फल ज़ुंण तेरी डरा हेठै रहणैं आल़ै भेटा।
6राज़े अमर लोल़ी खास्सी हुई,
सह लोल़ी पोस्ती दर पोस्ती ज़िऊंदअ रहअ।#61:6 सदा तेऊए ई खिंबा का राज़अ
7हे परमेशर, तेऊ लोल़ी सदा तेरी आछी सम्हनै राज़ किअ,
तूह कर आपणीं अटल़ झ़ूरी अर सत्ता करै तेऊए फाज़त।
8तेखअ करनी मुंह सदा तेरी ज़ै-ज़ैकार,
ज़ुंण मंऐं ताल्है मानत मनी सह बी करनी मुंह धैल़ पूरी।

Currently Selected:

भज़न 61: OSJ

Highlight

Copy

Compare

Share

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in