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भज़न 35

35
दुशमणा का ज़ितणा लै अरज़
राज़ै दाबेदो भज़न
1हे बिधाता, ज़ुंण दुशमण मेरअ दाऊअ करा, तिन्‍नां संघै लल़ तूह आप्पै,
ज़ुंण मुंह संघै जुध छ़ेल़ा, तिन्‍नां संघै कर तूह आप्पै जुध।
2हे बिधाता, आपणीं ढाल़
अर बर्छ़ी लई कर मेरी मज़त,
3आपणीं बर्छ़ी हार तिन्‍नां बाखा
ज़ुंण मुंह पिछ़ू आसा पल़ै दै,
तूह दै मुल्है ज़बान कि ताह हेरनअ हुंह बच़ाऊई।
4ज़ुंण मुंह मारनअ च़ाहा, तिंयां लोल़ी हारै अर शर्मिंदै हुऐ!
ज़ुंण मेरी हान्‍नी करने बिक्री सोठा,
तिंयां लोल़ी डरै पिछ़ू फिरै अर
तिन्‍नां जैंदरी लोल़ी झाख पल़अ।
5तिन्‍नां पिछ़ू छ़ाड आपणैं स्वर्ग दूत
अर तिंयां लोल़ी बागरी फर्ल़ाऊऐ दै भुखलै ज़िहै हुऐ।
6तिन्‍नें बात लोल़ी न्हैरी अर च़िफली हुई,
ताह बिधाते स्वर्ग दूत लोल़ी तिन्‍नां दरल़ाऊंदै पिछ़ू हुऐ पल़ै दै।
7किल्हैकि तिन्‍नैं डाहअ मुल्है थोघै बाझ़ी डुघी खाल़्ही प्रैंदै ज़ज़ाल़ छ़ैई,
तिन्‍नैं डाही मुंह मारना लै एही बाझ़ी मुल्है डुघी खात्ती खण्हीं।
8हे बिधाता, तिन्‍नां लै लोल़ी ती नच़ानक आफ़त पल़ी!
ज़ुंण ज़ज़ाल़ तिन्‍नैं मुल्है छ़ैअ, तेथ लोल़ी तै तिंयां आप्पू शाचै अर
तिंयां लोल़ी तै तैहा खात्ती दी आप्पू दाभूऐ ज़ुंण तिन्‍नैं मुल्है डाही ती खण्हीं!
9पर हे बिधाता, मुंह रहणअ ताह संघै मगन अर
मुंह आसा ऐहा गल्‍ले खुशी कि तंऐं डाहअ हुंह बच़ाऊई।
10मुंह बोल़णअ दिला का इहअ,
“ताह बिधाता बराबर निं कोहै आथी।
तूह बच़ाऊआ दुबल़ै मणछा जोधै मणछे हाथा का अर
रैनै-गरीब मणछा डाहा तूह च़ोरा-डाकू का बच़ाऊई।”
11कदुष्ट मणछ दैआ मेरै बारै झ़ुठी शाजत!
तिंयां लाआ मुल्है इहै ज़ुल्म करनैओ दोश ज़ेतो मुखा थोघ बी निं आथी!
12मेरै भलै करने बदल़ै करा तिंयां मुल्है बूरअ,
मुल्है आणा तिंयां गल़ै तैणीं घाटी।
13ज़धू तिंयां रोगी थिऐ, तधू किअ मंऐं तिन्‍नां लै शोग,
हुंह रहअ तिन्‍नें तैणीं भुखअ अर दुखा ज़िरदअ लागी,
मंऐं किई बिधाता सेटा माथअ टेक्‍की करै दिला का तिन्‍नां लै अरज़,
14हुंह डाहा त आपणैं दिलै तिन्‍नां लै इहअ भाअ कि
तिंयां आसा मेरै साथी अर मेरै भाई-भाऊ ज़िहै,
मंऐं किअ तिन्‍नां लै इहअ शोग ज़िहअ कुंण आपणीं ईजा लै करा।
15पर ज़ांऊं मुल्है खरी आई, तिंयां दुशमण हुऐ सोभै खुश!
तिन्‍नैं किअ मुंह फेर झाल़अ संघा लागै मेरै सुहांगा!
पाखलै मणछ तोही आऐ मुंह च़िक्‍कदै-मारदै,
तिंयां रहै कबल्‍लै मुंह धेल़दै-च़िरदै लागी।
16तिंयां लागा तै मेरै सुहांगा अर कई नाअं नोहकल़ी डाहंदै,
ज़िदै लागा तै तिंयां मुल्है दांदा कटिल्‍लदै!
17हे मेरै मालक, ताह केभै तैणीं रहणअ भाल़ै लागी?
ज़हा आफ़ता दी तिन्‍नैं दुशमणै हुंह पाअ, मुंह बच़ाऊ तेता का,
मेरी ज़िन्दगी बच़ाऊ इना नर्दैई सिहा का।
18ज़ेभै तेरै लोगो झाल़अ होए, तेभै करनअ मुंह तेरअ शूकर अर
तिन्‍नां सोभी नदरी करनी मुंह तेरी ज़ै-ज़ैकार।
19मेरै बारै झ़ुठी शाजत दैणैं आल़ै मेरै दुशमणा
निं लोल़ी मुंह हारने खुशी भेटी,
ज़ुंण थोघै बाझ़ी मुंह संघै ज़ीद डाहा,
तिन्‍नां निं दैई मुंह पिछ़ू सानै-कानै गल्‍ला करनै।
20किल्हैकि तिंयां निं मेल़-ज़ोल़े गल्‍ला ई करदै,
तिंयां सोठा नर्दोश मणछा लै छ़ल़-कपट मिल़ी-ज़ुल़ी हआ रहंदै लागै दै।
21तिंयां लाआ हेरा-हेरी मुल्है दोश!
तिंयां बोला थोघै बाझ़ी, “अह किअ तंऐं, हाम्हैं भाल़अ तूह आपणीं आछी!”
22पर हे मेरै मालक बिधाता, तूह हेरा सोभी गल्‍ला भाल़ी!
तूह किल्है आसा च़ुप्पी रहअ द?
हे मेरै मालक! तूह निं मुंह आप्पू का दूर करी!
23हे बिधाता, ऐबै उझ़ू संघा कर मेरअ नसाफ,
हे मेरै मालक, ऐबै कर तूह ई मेरै एऊ झ़गल़ै खतम।
24हे मेरै मालक बिधाता, तूह आसा धर्मीं, तूह खोज़ ऐबै आप्पै कि हुंह आसा नर्दोश,
मेरै दुशमणा निं मुल्है हास्सणैं दैई।
25तिन्‍नें निं आप्पू मांझ़े एही गल्‍ला लोल़ी हुई,
“हाम्हैं पाअ सह ज़िऊंदअ ई घुटी!
इहअ ई ता हाम्हैं च़ाहा तै।”
26ज़ुंण मेरी हान्‍नी करना लै खुश हआ,
तिंयां लोल़ी तै पठी हारै अर झाखुऐ,
तिंयां लोल़ी तै पठी बेइज़त अर शर्मिंदै हुऐ ज़ुंण
मुल्है इहअ बोला तै, “तूह निं हाम्हां सेटा किछ़ बी आथी!”
27पर ज़ुंण मेरी ज़ीत च़ाहा तै,
तिन्‍नां लोल़ी ती नाच़णै जोगी खुशी हुई,
एभा पोर्ही लोल़ी तै सदा तिंयां इहअ बोल्दै रहै,
“बिधाता भाल़ किहअ महान आसा! तेऊ हआ आपणैं दास सफल हणें खुशी।”
28तेखअ खोज़णअ मुंह सोभी का कि बिधाता आसा धर्मीं, तेऊ किअ मेरअ नसाफ
अर मुंह रहणअ सारी-सारी धैल़ी तेरी ज़ै-ज़ैकार करदै लागी।

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भज़न 35: OSJ

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