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भज़न 35:1
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हे बिधाता, ज़ुंण दुशमण मेरअ दाऊअ करा, तिन्नां संघै लल़ तूह आप्पै, ज़ुंण मुंह संघै जुध छ़ेल़ा, तिन्नां संघै कर तूह आप्पै जुध।
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भज़न 35:27
पर ज़ुंण मेरी ज़ीत च़ाहा तै, तिन्नां लोल़ी ती नाच़णै जोगी खुशी हुई, एभा पोर्ही लोल़ी तै सदा तिंयां इहअ बोल्दै रहै, “बिधाता भाल़ किहअ महान आसा! तेऊ हआ आपणैं दास सफल हणें खुशी।”
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भज़न 35:28
तेखअ खोज़णअ मुंह सोभी का कि बिधाता आसा धर्मीं, तेऊ किअ मेरअ नसाफ अर मुंह रहणअ सारी-सारी धैल़ी तेरी ज़ै-ज़ैकार करदै लागी।
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भज़न 35:10
मुंह बोल़णअ दिला का इहअ, “ताह बिधाता बराबर निं कोहै आथी। तूह बच़ाऊआ दुबल़ै मणछा जोधै मणछे हाथा का अर रैनै-गरीब मणछा डाहा तूह च़ोरा-डाकू का बच़ाऊई।”
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