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भज़न 30

30
बिधातो शूकर
भबने प्रतिष्ठा लै राज़ै दाबेदो भज़न
1हे बिधाता, मुंह करनी तेरी ज़ै-ज़ैकार
किल्हैकि तंऐं डाहअ हुंह बच़ाऊई अर
तंऐं निं मेरै दुशमणा लै खुशी दैनी हणैं।
2ए मेरै बिधाता, मंऐं पाई ताह सेटा पकार अर तंऐं
किअ हुंह नरोगअ।
3हे बिधाता, तंऐं बच़ाऊअ हुंह मरनै का
हुंह हणअ त घोरी पल़अ द, पर
तंऐं डाही मेरी ज़िन्दगी बच़ाऊई।
4ज़ुंण ताह बिधाते शुचै-पाक्‍कै लोग आसा,
तिन्‍नां करनी गिहा बोली तेरी ज़ै-ज़ैकार
अर तिन्‍नां करनअ तेरै पबित्र नाओं अदर।
5तेरअ रोश्श हआ थोल़ी घल़ी लै,
पर तेरी झींण रहा सारी ज़िन्दगी।
इहअ सका हई कि राची छ़ुटी होए केभै लेरा बी,
पर दोत्ती जाआ खुशी भेटी।
6हुंह त राज्ज़ी-मौज़ी संघा लागअ इहअ सोठदअ,
“ऐबै निं मुंह कुंण छ़ेल़ी बी सकदअ!”
7हे बिधाता, तूह त मुंह संघै,
तंऐं बणाअं हुंह उछ़टी धारा ज़िहअ पाक्‍कअ।
ज़ांऊं तंऐं मुंह बाखा पिठ फरेऊई,
तेखअ फिरअ मुंह हैल़अ।
8हे मेरै मालक बिधाता, मंऐं किई ताह ई सेटा अरज़,
मंऐं मांगी ताखा लेर-पकार पाई मज़त।
9ज़ै हुंह मरे, तेता करै ताह किज़ै च़ाल्‍लअ भेटी?
ज़ै हुंह घोरी दी च़िज़े, तेता करै ताह किज़ै नफअ च़ाल्‍लअ हई?
मूंऐं दै मणछ कै तेरअ शूकर करी सका?
तिंयां कै तेरै बारै होरी का खोज़ी सका कि तूह किहअ शुचअ-पाक्‍कअ आसा?
10हे बिधाता, मेरी अरज़ शुण, मुल्है कर झींण,
हे बिधाता, मेरी मज़त कर।
11तंऐं बदल़अ मेरअ शोग खुशी दी,
तंऐं किऐ मेरै दुख दूर अर
तंऐं दैनी फेर-फिरदी मुल्है खुशी ई खुशी।
12हे बिधाता, मुंह रहणअ तेरी ज़ै-ज़ैकार करना लै गिहा बोल्दै लागी,
ऐबै निं मुंह च़ुप्पी रहणअ,
हे बिधाता, मेरै परमेशर,
मुंह रहणअ सारी सदा तेरअ शूकर करदै लागी।

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