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भज़न 30:5
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
तेरअ रोश्श हआ थोल़ी घल़ी लै, पर तेरी झींण रहा सारी ज़िन्दगी। इहअ सका हई कि राची छ़ुटी होए केभै लेरा बी, पर दोत्ती जाआ खुशी भेटी।
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भज़न 30:11-12
तंऐं बदल़अ मेरअ शोग खुशी दी, तंऐं किऐ मेरै दुख दूर अर तंऐं दैनी फेर-फिरदी मुल्है खुशी ई खुशी। हे बिधाता, मुंह रहणअ तेरी ज़ै-ज़ैकार करना लै गिहा बोल्दै लागी, ऐबै निं मुंह च़ुप्पी रहणअ, हे बिधाता, मेरै परमेशर, मुंह रहणअ सारी सदा तेरअ शूकर करदै लागी।
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भज़न 30:2
ए मेरै बिधाता, मंऐं पाई ताह सेटा पकार अर तंऐं किअ हुंह नरोगअ।
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भज़न 30:4
ज़ुंण ताह बिधाते शुचै-पाक्कै लोग आसा, तिन्नां करनी गिहा बोली तेरी ज़ै-ज़ैकार अर तिन्नां करनअ तेरै पबित्र नाओं अदर।
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भज़न 30:1
हे बिधाता, मुंह करनी तेरी ज़ै-ज़ैकार किल्हैकि तंऐं डाहअ हुंह बच़ाऊई अर तंऐं निं मेरै दुशमणा लै खुशी दैनी हणैं।
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