भज़न 20
20
ज़ितणा लै अरज़
गाज़ै-बाज़ै आल़ेए सैणैं लै राज़ै दाबेदो भज़न
1खरीए पलका हेरनी बिधाता तेरी लेर-पकार शूणीं।
याकबे परमेशरा करनी तेरी सोभी आफ़ता का फाज़त।
2तेऊ करनी आपणीं पबित्र ज़ैगा का तेरी मज़त अर
तेऊ दैणअ ताल्है एरुशलेम नगरी का बल।
3तेऊ मनणी तेरी सारी भैंटा अर
सह हणअ तेरी हूम बल़ी अर मेल़-ज़ोल़े बल़ी करै खुश।
4बिधाता लोल़ी ती तेरी दिला-मन्नें पूरी किई अर
तूह लोल़ी हर गल्ला लै सफल हुअ।
5तेरी ज़ीत शूणीं करनी ती तेखअ हाम्हां बी ज़ोरै-ज़ोरै ज़ैकार अर
आपणैं परमेशरे नाओंऐं करनै तै फ्रहरै खल़ै।
बिधाता लोल़ी ती तेरी प्राथणां शूणीं।
6ऐबै गअ मुखा थोघ लागी कि बिधाता दैआ आपणैं छ़ांटै दै राज़ै लै ज़ीत,
सह शूणां पबित्र स्वर्गा का तेऊए अरज़ संघा दैआ
आपणैं महान बला करै तेऊ लै ज़ीत।
7कोई हआ आपणैं रथा या आपणैं घोल़ै प्रैंदै भरोस्सअ,
पर ए म्हारै परमेशर बिधाता,
म्हारअ भरोस्सअ आसा तूह।
8तिंयां इहै लोग बधल़णैं धरनीं उटी बाखा,
पर हाम्हैं रहणैं आज़रै खल़ै टेक्की।
9हे बिधाता, तूह दै राज़ै लै ज़ीत अर
ज़ेभै हाम्हैं अरज़ करे, तेभै लऐ म्हारी शूणीं।
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भज़न 20: OSJ
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