भज़न 15
15
बिधाता सेटा कुंण सका एछी
दाबेदो भज़न
1हे बिधाता, तेरै पबित्र खिम्भा भितरी कुंण सका डेऊई?
तेरी पबित्र धारा कुंण सका बस्सी?
2तेथ सका सिधै तिंयां ई मणछ डेऊई ज़ुंण नर्दोश ज़िन्दगी ज़िऊआ अर
कबल्लै भलअ ई करा,
अर ज़ुंण दिला का शुची गल्ला बोला।
3ज़ुंण होरीए बेइज़ती निं करदै,
ज़ुंण आपणैं साथी-संघी लै बूरअ निं करदै अर
नां तिन्नें फुआह पांदै।
4ज़ुंण बिधाता निं मंदै तिन्नां समझ़ा तिंयां बृथा,
पर बिधाते डरा हेठै रहणैं आल़ै मणछे करा तिंयां अदर।
तिंयां निं सोह खाई करै हुधदै,
च़ाऐ तेते किछ़ बी किम्मत किल्है निं पल़ै दैणीं।
5तिंयां निं ढब्बै ऋण दैई बैज़ बी ढाकदै,
नां तिंयां नर्दोश मणछे बारै झ़ुठअ बोल़णा लै रेशपत खांदै।
ज़ुंण मणछ इना सोभी गल्ला करा,
तिंयां रहणैं सदा बणी।
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भज़न 15: OSJ
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