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भज़न 139

139
बिधातो पठी ज्ञैन
गाज़ै-बाज़ै आल़ेए सैणैं लै राज़ै दाबेदो भज़न
1हे बिधाता, तंऐं आसा हुंह ज़ाच़अ भाल़अ द,
अर ताखा आसा मेरै बारै पठी थोघ।
2मेरै उझ़णै-बेशणे बारै आसा ताखा पठी थोघ,
ताखा जाआ उझै स्वर्गै एतरअ दूर थोघ लागी कि हुंह किज़ै सोठा।
3तूह रहा मुंह सोभी गल्‍ला लै ज़ाच़दअ भाल़अ लागी,
ताखा आसा सोभी गल्‍लो थोघ कि हुंह किज़ै-किज़ै करा।
4मेरी गल्‍ला करनै का आजी हआ ताखा थोघ कि
मंऐं किज़ै लाअ बोली!
5तूह आसा मुंह फेरा-फेर खल़अ।
तूह डाहा मुंह आपणीं बाहे महान बला करै बच़ाऊई।
6तेरै बारै सारअ ज्ञैन डाहणअ आसा मुल्है कठण,
अह समझ़णअ आसा मेरै बशा का बागै।
7ताह छ़ाडी हुंह किधा लै सका डेऊई?
ताखा दूर डेऊई किधी सका हुंह लुक्‍की?
8ज़ै हुंह उझै सरगा लै बी उखल़ूं, तिधी आसा तूह!
ज़ै हुंह उंधै पैईताल़ै बी डेऊं, तिधी बी आसा तूह!
9ज़ै हुंह डैअ दैई पुर्बा दिशा बाखा
समुंदरा पार डेऊई कांगनरांगै बी बस्सूं,
10तूह हणअ तिधी बी मेरी मज़त करदअ लागअ द अर
हाथा ढाकी मुंह नढैऊंदअ लागअ द।
11ज़ै हुंह इहअ बी बोलूं कि न्हैरै निं हुंह शुझुई च़ाल्‍लअ,
मुंह फेर प्रैश्शअ न्हैरी राची दी बधल़िए,
12पर तूह हेरा तेथ बी भाल़ी,
ताल्है हआ राची बी धैल़ी ज़िहअ प्रैश्शअ,
ताल्है हआ राच अर धैल़ी एक्‍कै ज़ेही।
13तंऐं आसा मेरी देही भितरे सोभै गल्‍ला बणाईं दी,
मेरी आसा आपणैं हाथै मेरी माए ओदरै हुंह बूणअ द।
14हुंह करा तेरअ शूकर किल्हैकि ताखा लागा डरनअ ई,
ज़ेऊ साबै तंऐं हुंह बणाअं सह आसा बडअ ज़बर अर नोखअ!
ऐहा गल्‍ला समझ़ा हुंह ज़ाथी राम्बल़ै करै।
15मेरी माए ओदरै ज़ोल़ै तंऐं
मेरै हाडकै-हाडकै बडै राम्बल़ै करै,
हुंह त गुप्त बझ़दअ लागअ द
पर ताखा निं मेरी किछ़ै च़ीज़ गुप्त आथी ती,
16तूह त मेरै ज़ल्म हणैं का आजी मुंह बझ़दै भाल़अ लागअ द।
मेरै ज़ल्म हणैं का आजी थिऐ तंऐं
मेरी ज़िन्दगीए हर धैल़ै
आपणीं कताबा दी लिखी हेरै दै डाही।
17हे परमेशर, तेरी सोठ समझ़णीं आसा मेरै बशा का बागै,
तेता निं कुंण गणी सकदअ कि सह केतरी आसा।
18ज़ै हुंह तेता गणदअ लागूं, तैबी निखल़णीं सह समुंदरे रेते कणीं का बी खास्सी,
ज़ेभै हुंह सुत्ती उझ़िआ, मुखा ज़ाण्हिंआं इहअ कि तूह आसा मुंह ई सेटा।
19हे परमेशर, हुंह च़ाहा त इहअ कि तंऐं लोल़ी कदुष्ट मारी पाऐ!
ज़ुल्म करनै आल़ै लोल़ी तै मुक्‍का दूर हुऐ!
20तिंयां करा ताह संघै कबल्‍लअ विश्वास घात,
तिंयां लआ तेरअ नाअं झ़ुठी गल्‍ला लै।
21हे बिधाता, ताखा आसा थोघ कि हुंह करा तिन्‍नां लै नफरत,
ज़ुंण ताह संघै ज़ीद डाहा अर ज़ुंण तेरै खलाफ आसा।
22तिन्‍नां समझ़ा हुंह आपणअ बी दुशमण,
मुंह आसा दिला का इना इहै लै नफरत।
23हे परमेशर, तूह ज़ाच़-भाल़ मुंह राम्बल़ै करै, संघा भाल़ मेरै मन्‍नैं किज़ै आसा,
तूह परख मुंह कि हुंह किज़ै सोठा।
24तूह दै भाल़णीं कि मुंह दी किज़ै खोट किनी आसा,
पर तूह निंऊं मुंह तैहा बाता ज़ेथ सदा लै ज़िन्दगी भेटा।

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भज़न 139: OSJ

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