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भज़न 139:14
बाघली सराज़ी बोली दी पबित्र शास्त्र
OSJ
हुंह करा तेरअ शूकर किल्हैकि ताखा लागा डरनअ ई, ज़ेऊ साबै तंऐं हुंह बणाअं सह आसा बडअ ज़बर अर नोखअ! ऐहा गल्ला समझ़ा हुंह ज़ाथी राम्बल़ै करै।
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भज़न 139:23-24
हे परमेशर, तूह ज़ाच़-भाल़ मुंह राम्बल़ै करै, संघा भाल़ मेरै मन्नैं किज़ै आसा, तूह परख मुंह कि हुंह किज़ै सोठा। तूह दै भाल़णीं कि मुंह दी किज़ै खोट किनी आसा, पर तूह निंऊं मुंह तैहा बाता ज़ेथ सदा लै ज़िन्दगी भेटा।
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भज़न 139:13
तंऐं आसा मेरी देही भितरे सोभै गल्ला बणाईं दी, मेरी आसा आपणैं हाथै मेरी माए ओदरै हुंह बूणअ द।
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भज़न 139:16
तूह त मेरै ज़ल्म हणैं का आजी मुंह बझ़दै भाल़अ लागअ द। मेरै ज़ल्म हणैं का आजी थिऐ तंऐं मेरी ज़िन्दगीए हर धैल़ै आपणीं कताबा दी लिखी हेरै दै डाही।
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भज़न 139:1
हे बिधाता, तंऐं आसा हुंह ज़ाच़अ भाल़अ द, अर ताखा आसा मेरै बारै पठी थोघ।
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भज़न 139:7
ताह छ़ाडी हुंह किधा लै सका डेऊई? ताखा दूर डेऊई किधी सका हुंह लुक्की?
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भज़न 139:2
मेरै उझ़णै-बेशणे बारै आसा ताखा पठी थोघ, ताखा जाआ उझै स्वर्गै एतरअ दूर थोघ लागी कि हुंह किज़ै सोठा।
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भज़न 139:4
मेरी गल्ला करनै का आजी हआ ताखा थोघ कि मंऐं किज़ै लाअ बोली!
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भज़न 139:3
तूह रहा मुंह सोभी गल्ला लै ज़ाच़दअ भाल़अ लागी, ताखा आसा सोभी गल्लो थोघ कि हुंह किज़ै-किज़ै करा।
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