भज़न 119
119
बिधातो बधान
1बिधाता दैआ तिन्नां लै बर्गत ज़हा दी किछ़ै खोट निं हंदी अर
ज़ुंण बिधाते बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊआ।
2सह दैआ तिन्नां लै बर्गत ज़ुंण तेऊए हुकम मना,
अर दिला का तेऊ नेल़ रहा।
3तिंयां निं किछ़ै गलती करदै अर
तिंयां रहा तेस्सी हांढदै लागी ज़ुंण बात बिधाता खोज़ा।
4हे बिधाता, तंऐं दैनअ हाम्हां लै आपणअ बधान अर
तेरअ आसा इहअ हुकम कि हाम्हैं लोल़ी सह सदा मनअ।
5तै भाल़ किहअ हणअ त ज़ै हुंह तेरै बधाने
सोभी गल्ला मनणा लै शुचअ-पाक्कअ हंदअ!
6ज़ै हुंह तेरै बधाने सोभी गल्ला दी धैन दैंऊं,
तै निं मुंह शर्मिंदै पल़णअ हणअ।
7तेरअ धर्मीं बधान शिखल़ी करै करनअ मुंह
शुचै दिलै तेरअ शूकर अर तेरी ज़ै-ज़ैकार।
8मुंह ज़िऊंणीं तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी,
मुंह निं तूह शोटी डाही!
बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणीं
9खारकै मणछ सका बिधाते हुकम मनी
शुची ज़िन्दगी ज़िऊई।
10हे बिधाता, हुंह रहा तत्त-दिला का तेरी च़ाकरी लागी,
तूह निं मुंह आपणैं बधाने बिधी का कबाता दैई पेशणैं।
11मंऐं आसा तेरअ बधान आपणैं दिलै डाहअ द,
ताकि हुंह ताखा किछ़ पाप करदअ निं शुझिए।
12हे बिधाता, हुंह करा तेरी ज़ै-ज़ैकार,
तूह खोज़ मुखा आपणीं बिधी आप्पै।
13ज़ुंण बधान तंऐं खोज़अ,
सह खोज़णअ मुंह आपणीं खाखा का सोभी का।
14तेरअ हुकम मनी भेटा
बडै सेठ हणैं का बी खास्सी खुशी।
15मुंह दैणअ तेरै बधाना दी धैन अर
तेरी शिक्षा दी रहणअ मुंह बच़ार करदै लागी।
16मुंह हणअ तेरै बधाना दी सुखी,
मुंह डाहणीं तेरी सोभै गल्ला आद।
बिधाते बधाना दी खुशी
17हे बिधाता, हुंह आसा तेरअ दास, तूह रहै मुल्है भलअ,
ताकि हुंह ज़िऊंदअ रहे अर ज़िहअ तूह बोला हुंह तिहअ ई करूं।
18तूह खोल्ह मेरी आछी ताकि हुंह तेरै
बधाने महान सत्त भाल़ी सकूं।
19हुंह आसा इधी पृथूई दी परदेसी अर थोल़ै धैल़ै लै,
तूह निं आपणैं-आपणैं हुकम मुखा च़ोरी डाही।
20हुंह च़ाहा कबल्लअ तेरी बिधी शिखल़णअ अर
तेरै बधानो सदा अदर करनअ।
21तिन्नां लागअ फिटक, तंऐं दैनी तिन्नां लै सज़ा ज़ुंण शरेरै फिरा तै अर
ज़ुंण तेरै बधाना का कबाता थिऐ पेठै दै।
22हे बिधाता, तिन्नां निं मेरअ सुहांग अर बेइज़ती दैई करनै,
किल्हैकि हुंह ज़िऊआ तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी।
23राज़ करनै आल़ै हुऐ मेरै खलाफ आप्पू मांझ़ै कठा,
पर मुंह रहणअ तेरै बधाने ई बारै बच़ार करदै लागी।
24तेरै बधाना करै भेटा मुंह खास्सी खुशी!
तेरअ बधान आसा मुल्है सलाहकारा ज़िहअ।
बधाने मनणे सोह खाणैं
25हुंह आसा धरनीं मरदअ पल़अ द,
तूह कर मुंह उझै खल़ै ज़िऊंदै, ज़ेही तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
26मंऐं ताखा आपणअ च़ाल-च़लण पठी, तंऐं हेरी मेरी अरज़ शूणीं,
ऐबै खोज़ तूह मुखा आपणीं बिधी।
27तूह कर मेरी मज़त कि मुंह तेरअ बधान समझ़ एछे,
तै रहणअ हुंह तेरै महान कामें बारै सोठदअ लागी।
28हुंह डुबअ बाख खरी दी,
तूह दै मुल्है ऐबै बल, ज़ेही तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
29तूह डाह मुंह उंबल़ी बाता का दूर,
तूह शखैल़ मुखा झणैल़ू हई आपणअ बधान।
30मंऐं ढाकी आप्पू सह बात ज़ेथ सत्त आसा,
हुंह डाहा कबल्लअ तेरै बधाना दी धैन।
31हे बिधाता, हुंह करा तिहअ ई ज़िहअ तेरअ बधान खोज़ा,
तूह निं मुंह शर्मिंदै दैई हणैं।
32ज़िहअ तूह बोला, हुंह च़ाहा तिहअ ई करनअ,
तूह कर मेरी मज़त कि मुंह लोल़ी होर बी खास्सी समझ़ आई।
समझ़ एछणा लै बिधाता का अरज़
33हे बिधाता, तूह खोज़ मुखा तेरै बधाने भेद,
मुंह ज़िऊंणीं सारी ज़िन्दगी तेते ई साबै। #119:33 सह हणअ मुल्है फल
34तेरै बधाना समझ़णा लै कर मेरी मज़त, मुंह करनअ तिहअ ई,
मुंह ज़िऊंणीं दिला का तेते साबै आपणीं ज़िन्दगी।
35तूह कर मेरी मज़त कि हुंह तेरै हुकम मनूं,
किल्हैकि मेरी खुशी आसा तेतै।
36तूह कर इहअ कि मेरै दिलै लोल़ी सेठ हणैं का खास्सअ,
तेरै बधाना बाखा लोभ हुअ।
37बृथा गल्ला#119:37 बृथा गल्ला मुहुर्ती/मैहरै दी धैन दैणैं का डाह मुंह दूर,
मुंह लोल़ी ताह संघै हांढदी ज़िन्दगी भेटी।
38हे बिधाता, ज़ेते तंऐं आपणैं डरा हेठै रहणैं आल़ै लै ज़बान आसा दैनी दी,
सह ज़बान लोल़ी तेरी मुल्है बी हुई।
39तूह बच़ाऊ मुंह तैहा बेइज़ती हणैं का ज़ेते ज़ेता का हुंह डरा,
किल्हैकि तेरअ नसाफ आसा महान।
40हुंह च़ाहा तेरै बधाने साबै आपणीं ज़िन्दगी ज़िऊंणीं,
मुल्है दै नऊंईं ज़िन्दगी किल्हैकि तूह आसा धर्मीं।
बिधाते बधाना दी भरोस्सअ
41हे बिधाता, तूह कर ऐहा गल्ला प्रगट कि तूह मुल्है केतरअ झ़ूरा,
तूह बच़ाऊ मुंह ज़िहअ तंऐं आप्पै आसा बोलअ द।
42तै सका हुंह तिन्नां लै ज़बाब दैई ज़ुंण
तेरै बैण मनणै पिछ़ू मेरी बेइज़ती करा।
43तूह कर मेरी मज़त कि मंऐं लोल़ी सदा सत्त खोज़अ,
किल्हैकि हुंह रहा तेरै बधाने आसरै।
44मुंह रहणअ सदा तिहअ ई ज़िहअ तेरअ बधान खोज़ा अर
सदा तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊंदै लागी।
45मुंह रहणअ सदा आज़ाद हांढदै लागी,
किल्हैकि हुंह डाहा तेरी गल्ला आद।
46हुंह निं राज़ै सेटा बी तेरै हुकम खोज़णैं का पिछ़ू हटदअ
अर नां तेते शरम च़ेतदअ।
47मेरी हआ सह ई खुशी कि हुंह तेरै हुकम मनूं,
किल्हैकि हुंह झ़ूरा तेता ई लै खास्सअ।
48मेरै दिलै आसा तेरै हुकमा लै अदर अर हुंह झ़ूरा बी तेता लै,
मुंह रहणअ कबल्लै तेते ई बारै सोठदै लागी।
बिधाते बधाने आसरै रहणअ
49हे बिधाता, ज़ुंण तंऐं मुल्है ज़बान आसा दैनी दी, तैहा डाहै आद,
मुंह आसा तेतो ई आसरअ।
50तेता ई करै भेटा मुंह खरीए पलका हैअ,
किल्हैकि तेरअ बैण दैआ मुल्है ज़िन्दगी।
51शरेरै मणछ करा मेरअ सुहांग,
पर हुंह निं तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणै का पिछ़ू हटअ।
52हे बिधाता, मुंह एछा खास्सी साला पैहलै किअ द तेरअ नसाफ आद,
तेता करै फिरा मुंह मेरै दिलै हैअ।
53ज़ांऊं मुखा इहअ शुझिआ कि कदुष्ट मणछ डेओआ तेरै बधाना का उंबल़ी बाखा,
तेता भाल़ी एछा मुंह खास्सी रोश्शै।
54एऊ संसारै मेरी ऐहा होछ़ी ज़ेही ज़िन्दगी दी
गांठा हुंह तेरै बधाने बिधीए गिहा।
55हे बिधाता, मुंह एछा राची बी तेरी आद,
संघा रहा हुंह तेरै बधाने बारै सोठदअ लागी।
56मुंह हआ तेरै हुकम मनणे बेघै खुशी अर
तेरै बधाने बारै रहा हुंह बच़ार करदअ लागी।
बधाना दी धैन डाहणअ
57हे बिधाता, मेरी सोभै गल्ला आसा तूह ज़ेता हुंह च़ाहा,
मंऐं आसा तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणें सोह खाऐ दै।
58हुंह करा दिला का ताह सेटा अरज़ कि तूह कर मुल्है झींण,
ज़ेही तंऐं आप्पै ज़बान आसा दैनी दी।
59हुंह डाहा आपणैं बारै खास्सअ धैन अर
हुंह च़ाहा तिहअ ई करनअ ज़िहअ तूह बोला।
60ज़िहअ तूह हुकम करा, हुंह करा तेभी तिहअ ई,
तेथ निं हुंह धख बी बल़ैग पांदअ।
61कदुष्ट मणछै आसा मुल्है फाही पाई दी,
पर हुंह निं तेरअ बधान बिस्सरदअ।
62तेरै धर्मीं बधाने ज़ै-ज़ैकार करना लै उझ़िआ
हुंह आधा राची बी खल़अ।
63हुंह डाहा तिन्नां संघै साथ संगत ज़ुंण तेरी डरा हेठै रहा
अर तेरअ बधान मना।
64हे बिधाता, तूह करा सारी पृथूई लै खास्सी झींण,
तूह शखैल़ मुखा आपणैं बधाने सोभै बिधी।
बधान किल्है आसा खास
65हे बिधाता, हुंह आसा तेरअ दास, तूह आसा मुल्है भलअ
ज़िहअ तूह बोला तिहअ ई।
66तूह दै मुल्है अक्ल अर सुंबल़ी सोर,
किल्हैकि हुंह करा तेरै हुकमो भरोस्सअ।
67ज़ेभै तैणीं तंऐं हुंह नैरअ निं तेभै तैणीं रहअ हुंह गलती करदअ लागी,
पर ऐबै मना हुंह तेरै हर बैण।
68हे बिधाता, तूह भाल़ किहअ भलअ अर झणैल़ू आसा!
तूह शखैल़ मुखा आपणैं बधाने सोभै बिधी।
69शरेरै मणछै आसा मेरै बारै झ़ुठी फुआह फणाऊंई दी,
पर हुंह मना दिला का तेरी सोभै गल्ला।
70तिन्नां शल़ैघी मणछा निं सोर-समझ़ ई आथी,
पर हुंह रहा तेरै बधाना दी खुश।
71ज़ुंण तंऐं मुल्है सज़ा दैनी, सह हुअ मुल्है भलअ,
किल्हैकि तेता करै लागअ हुंह तेरै बधाना राम्बल़ै करै आद करदअ।
72ज़ुंण बधान तंऐं मुल्है दैनअ, सह आसा मुल्है
सारै हज़ारो-लाखों सुन्नैं-च़ंदीए सिक्कै का बी खास्सअ किम्मती।
बधानो नसाफ
73हे बिधाता, हुंह आसा तंऐं आपणैं हाथै बणाअं द अर तंऐं ई आसा हुंह बच़ाऊई डाहअ द,
तूह दै मुल्है एही समझ़ कि हुंह तेरअ बधान शिखल़ी सकूं।
74तै हणैं तिंयां खुश ज़ुंण तेरअ अदर करा,
किल्हैकि हुंह करा तेरै बैणा दी भरोस्सअ।
75मुखा आसा थोघ कि तेरअ नसाफ हआ धर्मीं,
तंऐं दैनी मुल्है तैही सज़ा किल्हैकि तूह आसा शुचअ।
76हे बिधाता, हुंह करा तेरी च़ाकरी, मुंह लोल़ी तेरी अटल़ झ़ूरी करै शांती भेटी,
ज़ेही तंऐं मुल्है ज़बान आसा दैनी दी।
77तेरी झींण लोल़ी मुल्है सदा हुई, तै रहणअ हुंह ज़िऊंदअ
किल्हैकि हुंह रहा तेरै बधाना दी खुश।
78घमंडी मणछ लोल़ी शर्मिंदै हुऐ ज़ुंण मुंह शल़ैघा घल़ी बदनाम करा,
पर मुंह डाहणअ तेरै बधान अर बिधी दी धैन-मन्न लाई।
79ज़ुंण तेरी डरा हेठै रहा, अर ज़ुंण तेरअ बधान ज़ाणा,
तिंयां लोल़ी मुंह सेटा लै आऐ।
80हुंह लोल़ी तेरै बधाना मनणा लै पाक्कअ हुअ,
अर मुंह निं लोल़ी शर्मिंदै पल़अ हणअ।
छ़ुटकारै लै अरज़
81हे बिधाता, हुंह च़ाल्लअ शुक्की-मुक्की, न्हैल़अ लागअ द कि ताह बच़ाऊंणअ हुंह,
हुंह आसा सिधअ तेरै बैणे आसरै रहअ द।
82मेरी आछी फिरी न्हैल़ी-भाल़ी-भाल़ी पाल्ली कि ज़ुंण तंऐं बोलअ, तिंयां गल्ला केभै हणीं पूरी!
हुंह बोला ऐबै इहअ, “ताह मेरी मज़त केभै करनी?”
83हुंह हुअ शुक्कै खाल्हल़ै ज़िहअ बृथा,
पर तज़ी बी निं मंऐं तेरै बधाने बिधी बिस्सरी आथी।
84हे बिधाता, हुंह करा तेरी च़ाकरी, मुंह केभै तैणीं रहणीं अह खरी पल़ी?
ज़ुंणी हुंह हंती-हंती मारी आणअ, तिन्नां लै कधू दैणीं ताह सज़ा?
85ज़ुंण शरेरै तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी नांईं ज़िऊंदै,
तिन्नैं आसा मुल्है डुघी खात्ती डाही दी खण्हीं।
86तेरै आसा सोभै हुकम शुचै,
तिन्नैं शल़ैघी आणअ हुंह हंती-हंती मारी, तूह कर मेरी मज़त।
87ऐबै च़ाल्लै तिंयां मुंह मारना लै सफल हई,
पर मंऐं निं तेरै बधाने बिधी बिस्सरी आथी।
88तूह कर मुल्है आपणीं अटल़ झ़ूरी प्रगट, संघा डाह मुंह ज़िऊंदै,
ताकि हुंह तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊई सकूं।
बधाना दी विश्वास
89हे बिधाता, तेरअ बैण आसा अटल़,
अर सह रहा भ्रमंडै सदा।
90तेरअ सत्त रहअ पोस्ती दर पोस्ती,
तंऐं आसा पृथूई टकैल़ी डाही दी अर सह आसा आझ़ तैणीं तेही ई टेक्की दी।
91ज़िहअ तंऐं बैण बोलअ, सोभै गल्ला आसा आझ़ बी तेही ई,
किल्हैकि तिंयां सोभै गल्ला करा तेरी ई च़ाकरी।
92ज़ै मेरी खुशीओ मूल़ तेरअ बधान निं हंदअ,
तै जाणअ त हुंह खरीए पलका कधू मरी!
93हुंह निं तेरी गल्ला कधि बिस्सरदअ,
किल्हैकि तिंयां गल्ला डाहा मुंह ज़िऊंदै।
94हे बिधाता, हुंह आसा तेरअ, तूह बच़ाऊ मुंह!
हुंह रहअ तेरै बधाने सोभी गल्ला मंदअ लागी।
95कदुष्ट मणछ आसा मुंह मारना लै ताखुऐ दै,
पर मुंह डाहणअ तेरै बधाना दी आपणअ धैन-मन्न लाई।
96मंऐं शिखल़ी अह गल्ला कि पठी पूरी निं सोभै गल्ला हंदी,
पर तेरै हुकम आसा शुचै अर पठी पूरै।
बधाना लै झ़ूरनअ
97हुंह झ़ूरा तेरै बधाना लै खास्सअ!
हुंह रहा सारी धैल़ी तेते ई बारै सोठदअ लागी।
98हर बगत रहा मेरै दिलै तेरै हुकम अर
तेता करै हआ हुंह आपणैं दुशमणा का खास्सअ अक्ली आल़अ।
99मुंह आसा आपणैं सोभी गूरू का बी खास्सी समझ़,
किल्हैकि हुंह डाहा तेरी गल्ला दी आपणअ धैन-मन्न लाई।
100मुंह आसा प्रोढै मणछा का बी खास्सी अक्ल,
किल्हैकि हुंह मना तेरै हुकम।
101हुंह रहा कदुष्ट कामां करनै का दूर,
किल्हैकि हुंह च़ाहा ज़िहअ तूह बोला तेही ज़िन्दगी ज़िऊंणअ।
102हे बिधाता, मेरअ गूरू आसा तूह,
हुंह निं तेरै बैणा का ओर्ही नां पोर्ही डेऊंदअ।
103तेरै बैण लागा मुंह मिठै,
तिंयां आसा मखीरा का बी खास्सै मिठै।
104मुंह भेटा तेरै बधाना का अक्ल,
तैही करा हुंह कदुष्ट कामां का नफरत।
बधानो प्रैश्शअ
105तेरअ बैण आसा मुल्है सलाह दैणैं आल़अ दीअ अर
बाता आजू हांढणा लै प्रैश्शै ज़िहअ।
106तेरअ बधान आसा शुचअ,
मूंऐं आसा तेते साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणें सोह खाऐ दै।
107हे बिधाता, मुंह आसा बेघै आफ़त पल़ी दी,
तूह डाह मुंह ज़िऊंदै, ज़ेही तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
108हे बिधाता, मेरी गल्ला मन्न शूकर करने बल़ीदाने मानता ज़ेही,
संघा दै तूह मुल्है आपणैं बधाने शिक्षा।
109मुल्है हआ कबल्लअ मरनैओ खातरअ,
पर तज़ी बी निं हुंह तेरै बधाना बिस्सरदअ।
110कदुष्ट मणछै आसा मुल्है ज़ज़ाल़ डाहै दै छ़ैई,
पर हुंह निं तेरी शिक्षा का कबाता पेठअ आथी।
111हुंह मना इहअ कि तेरै हुकम आसा मुल्है एही ज़ैदात ज़ुंण सदा रहणीं,
तेते खुशी करै रहा मेरअ दिल भरी।
112मंऐं आसा डाही दी एही पाक्की सोठ कि ज़ेभै तैणीं हुंह ज़िऊंदअ आसा
तेभै तैणीं ज़िऊंणीं मुंह तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी।
बधाना दी फाज़त
113दोगल़ै मणछा का आसा मुंह नफरत।
पर आप्पू झ़ूरा हुंह तेरै बधाना लै।
114मेरी शरण लणें ज़ैगा अर मुंह बच़ाऊंणै आल़अ आसा तूह ई।
मेरअ आसरअ आसा सिधअ तेरअ बैण ई।
115ओ पापी मणछो, मुंह सेटा का डेओआ दूर।
ज़िहअ बिधाता हुकम किअ, मुंह दैआ तेऊ साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणै।
116हे बिधाता, ज़ेही तंऐं ज़बान आसा दैनी दी, तेऊ साबै दै मुल्है ज़ोर-ज़ाहण कि हुंह ज़िऊंदअ रहे,
तूह निं मेरअ हैअ चुटणै दैई।
117तूह डाह मुंह ढाकी, तै रहणअ हुंह बच़ी,
तै रहणअ कबल्लअ मेरअ धैन तेरै बधाने बिधी दी।
118ज़ुंण तेरै बधाना बृथा समझ़ा, तिन्नां निं तूह मंदअ,
तिन्नें धोखै दैणें बिक्री आसा बृथा।
119तंऐं काढै पृथूईए कदुष्ट मणछ चाण-भांडै दी लागै दै चेरखै ज़िहै पोर्ही,
तैही झ़ूरा हुंह तेरै बधाने बिधी लै खास्सअ।
120ज़ांऊं मुंह तेरै नसाफ करने बारै सोठा,
तेता सोठी छ़ुटा मुंह डरै दर्छ़णअ।
बिधातो बधान मनणअ
121मंऐं किअ सह ई काम ज़ुंण भलअ अर शुचअ आसा,
तूह निं मुंह मेरै दुशमणा जैंदरी शोटी डाही!
122हुंह आसा तेरअ च़ाकर, तूह दै मुल्है ज़बान कि ताह करनी मेरी मज़त,
शरेरै मणछा निं मुंह हारनै-मारनै दैई।
123मेरी आछी फिरी तेरी मज़त एछदी भाल़ी-भाल़ी पाल्ली अर
हुंह आसा न्हैल़अ लागअ द कि तेरी ज़बान केभै हणीं पूरी।
124हे बिधाता, हुंह आसा तेरअ दास तूह कर मुल्है झ़ूरी ज़ुंण अटल़ आसा,
संघा शखैल़ मुखा आपणैं बधाने बिधी।
125हुंह करा तेरी च़ाकरी, तूह दै मुल्है समझ़,
ताकि हुंह तेरी शिक्षा शिखल़ी सकूं।
126हे बिधाता, ऐबै गअ तेरै काम करनैओ बगत पुजी!
किल्हैकि लोगै छ़ाडी तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणीं।
127हुंह झ़ूरा तेरै हुकमा लै च़ोखै सुन्नैं
अर च़ंदी का बी खास्सअ।
128हुंह करा हर गल्ला तेही ई ज़िहअ तूह हुकम करा,
हुंह करा एही गल्ला का नफरत ज़ुंण मुंह कबाता सका पाई।
बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणें च़ाह
129हे बिधाता, तेरी शिक्षा आसा महान,
हुंह ज़िऊआ आपणीं ज़िन्दगी तेते साबै दिला का।
130तेरै बैणे समझ़ दैआ मेरै मन्नां लै प्रैश्शअ,
तेता करै एछा ऐडै मणछा बी अक्ल।
131हुंह फहुंकुअ खास्सअ किल्हैकि
हुंह च़ाहा दिला ज़िहअ बी तूह हुकम करे तिहअ करनअ।
132तूह सोठ मेरै बारै संघा कर मुल्है झींण,
ज़िहअ तूह ताल्है झ़ूरनै आल़ै लै करदी आअ।
133तूह कर ज़िहअ तंऐं बोलअ तेही आपणीं ज़बान पूरी,
मुंह निं बधल़णैं दैई अर कबध गल्ला का डाहै मुंह दूर।
134ज़ुंणी हुंह हंती-हंती मारी आणअ, तिन्नां मणछा का बच़ाऊ मुंह तूह आप्पै,
ताकि हुंह ज़िहअ तूह हुकम करे तिहअ ई करूं।
135हे बिधाता, मुंह बाखा लोल़ी तंऐं प्रैश्शै मुंहैं भाल़अ,
संघा शखैल़ मुखा आपणैं बधाने सोभी बिधी।
136ज़ांऊं हुंह लोगा भाल़ा कि तिंयां निं तेरअ बधान मंदै,
मेरै लागा आछी का आशूए छ़ो-छ़ंध।
बधानो नसाफ
137हे बिधाता, तूह आसा धर्मीं अर
तेरै बधाना दी आसा नसाफ।
138बधान दी तंऐं ज़ुंण बिधी आसा खोज़ी दी,
तिंयां आसा पठी शुची अर भली।
139ज़ांऊं हुंह भाल़ा कि मेरै दुशमण निं तेरै बधाने कदर करदै,
मेरै दिलै हआ तेभै खास्सअ दुख।
140हे बिधाता, तेरअ बैण आसा शुचअ-पाक्कअ,
तैही झ़ूरा हुंह तेरअ च़ाकर तेता लै खास्सअ।
141हुंह निं किछ़ बी आथी, हुंह आसा बृथा,
पर तज़ी बी निं हुंह तेरै बधाने बिधी बिस्सरदअ।
142तूह आसा धर्मीं अर तेरअ नसाफ आसा अटल़,
अर तेरअ बधान आसा शुचअ।
143हे बिधाता, हुंह आसा खरी दी पल़अ द,
पर तेरै हुकम करा मुंह सुखी।
144ज़ुंण तूह चतैनगी दैआ, तिंयां आसा भली,
मुल्है दै तूह ई समझ़ ताकि हुंह ज़िऊंदअ रहूं।
छ़ुटकारै लै अरज़
145हे बिधाता, मेरी आसा ताह सेटा दिला का अरज़, ज़ीबाण तूह दै मुल्है ज़बाब,
हुंह दैआ ताल्है ज़बान कि हुंह निं तेरअ हुकम बिस्सरदअ।
146मेरी आसा ताह सेटा पकार कि मुंह बच़ाऊ,
ताकि हुंह तेरै बधाने साबै आपणीं ज़िन्दगी ज़िऊई सकूं।
147दोत्ती मांगा हुंह दोत्थी ताखा अरज़ करी मज़त,
हुंह रहा तेते आसरै ज़ुंण तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
148हुंह रहा सारी राची बिहुदअ,
संघा रहा हुंह तेरी गल्ले बच़ार करदअ लागी।
149किल्हैकि तेरअ मुल्है झ़ूरनअ आसा अटल़।
हे बिधाता, मुल्है कर झींण, तूह डाह मुंह ज़िऊंदै।
150मुंह हारनै-मारनै आल़ै गऐ मुंह नेल़ पुजी,
तिंयां निं तेरअ बधान मंदै।
151पर हे बिधाता, मुंह संघै आसा तूह आप्पै,
अर तेरै हुकम आसा अटल़।
152खास्सी साला ओर्ही आसा हुंह तेरै बधाना शिखल़दअ लागअ द,
कि तंऐं आसा सह सदा लै डाहअ द बणाईं।
मज़त करना लै बिधाता का अरज़
153हे बिधाता, तूह भाल़ मेरी खरी संघा बच़ाऊ मुंह,
किल्हैकि मंऐं निं तेरअ बधान बिस्सरअ आथी।
154मुंह बाखा दै ज़बाब तूह ई, संघा कर मुंह आज़ाद,
तूह बच़ाऊ मुंह ज़ेही तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
155कदुष्ट मणछो बच़णअ आसा कठण,
किल्हैकि तिंयां निं तेरै बधाने कदर करदै।
156पर हे बिधाता, तेरी झींण आसा महान,
तूह कर मुल्है झींण संघा बच़ाऊ मुंह!
157मुंह हारनै-मारनै आल़ै अर दुशमण आसा खास्सै,
पर हुंह निं तेरै बधाना मनणै का पिछ़ू हटदअ।
158विश्वास घाती ज़ुंण तेरै हुकम नांईं मंदै,
तिन्नां भाल़ी हआ मुंह तिन्नां लै नफरत।
159हे बिधाता, तूह भाल़ हुंह तेरै बधाना लै किहअ झ़ूरा,
तूह कर मुल्है आपणीं अटल़ झ़ूरी प्रगट संघा बच़ाऊ मुंह!
160तेरै सारै बैण आसा शुचै,
तेरी शिक्षा दी आसा सत्त अर तेरअ बधान आसा अटल़।
दिला-मन्नां का बधान मनणअ
161प्रधान आसा थोघै बाझ़ी मुंह हंतदै पिछ़ै पल़ै दै,
पर हुंह करा तेरै बधाने खास्सी कदर।
162तेरै बैणा लै हआ हुंह इहअ खुश ज़िहअ कुंण
धन-माया भेटी करै खुश हआ।
163मुंह आसा झ़ुठअ बोल़णैं का खास्सी नफरत
पर तेरै बधाना लै झ़ूरा हुंह खास्सअ।
164तेरै धर्मीं नसाफे बारै सोठा हुंह
सारी धैल़ी साता बारी।
165ज़ुंण तेरै बधाना लै झ़ूरा, तिंयां जाआ बच़ी,
तिन्नां निं किछ़ै च़ीज़ धरनीं बदल़ी सकदी।
166हे बिधाता, मुंह आसा सिधअ तेरअ आसरअ कि ताह हेरनअ हुंह बच़ाऊई,
हुंह कर तिहअ ई ज़िहअ तूह हुकम करा।
167हुंह झ़ूरा तेरै बधाने साबै ज़िन्दगी ज़िऊंणां लै खास्सअ,
हुंह मना तेता दिला का।
168हुंह करा तिहअ ई ज़िहअ तूह हुकम करा अर ज़ेही तूह चतैनगी दैआ,
तूह हआ आप्पै मुंह भाल़अ लागअ द कि हुंह किज़ै करा।
बिधाता का मज़त
169हे बिधाता, मेरी लेर-पकार लोल़ी ताह सेटा पुजी!
तूह दै मुल्है समझ़ ज़िहअ तंऐं आप्पै आसा बोलअ द।
170ज़ीबाण, मेरी लेर-पकार शुण,
मुंह बच़ाऊ तूह ज़ेही तंऐं ज़बान आसा दैनी दी।
171मुंह करनी सदा तेरी ज़ै-ज़ैकार,
किल्हैकि तंऐं शखैल़ी मुखा आपणैं बधाने सोभै बिधी।
172मुंह गांठणी तेरै बधाने गिह,
किल्हैकि तेरै सोभै हुकम आसा धर्मीं।
173तूह आसा हर बगत मेरी मज़त करनअ लै खल़अ,
किल्हैकि हुंह ज़िऊआ आपणीं ज़िन्दगी तेही ज़िहअ तूह हुकम करा।
174हे बिधाता, मुंह आसा आशा कि ताह हेरनअ हुंह बच़ाऊई,
हुंह रहा तेरै बधाना दी खुश।
175तूह दै मुल्है ज़िन्दगी ताकि हुंह तेरी ज़ै-ज़ैकार करी सकूं।
तेरी चतैनगी करै लोल़ी मुंह मज़त भेटी।
176हुंह तेरअ दास आसा हेल़्ही का दूर लुक्की दी भेडा ज़िहअ कबाता पेठअ द,
तूह एछ मुंह लोल़अ आप्पै, हुंह आसा तेरअ च़ाकर,
किल्हैकि मंऐं निं तेरअ बधान बिस्सरअ आथी।
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भज़न 119: OSJ
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