भज़न 113
113
ज़ेभै गरज़ पल़ी, तेभै करा बिधाता मज़त।
1बिधाते ज़ै-ज़ैकार करा।
ज़ुंण तम्हैं तेऊए च़ाकरी करा,
तम्हैं करा तेऊए ज़ै-ज़ैकार।
2बिधाते ज़ै-ज़ैकार लोल़ी
आझ़ा पोर्ही सारी सदा हुई।
3पुर्बा ओर्ही पछ़मा तैणीं करा सोभै
बिधाते नाओंए ज़ै-ज़ैकार।
4बिधाता करा सोभी देशा प्रैंदै राज़,
तेऊओ प्रतप्प आसा सारै भ्रमंडा का बी उछ़टअ।
5म्हारै परमेशर बिधाता ज़िहअ निं होर कोहै आथी,
सोभी का उछ़टै दी आसा सह ई बेठअ द।
6पर सह हआ तिधा का उंधै पृथूई भाल़अ लागअ द।
7सह झ़ैऊआ रैनै-गरीबा
माट्टै अर छ़ारे रूल़ी जैंदरा का उझै,
8ताकि सह तिन्नां आपणीं परज़े सैणैं
संघै राज़ करना लै साझ़ू हई सके।#आयू. 36:7
9ज़हा बेटल़ीओ हुअ-ज़ाअ निं आथी, तैहा लै दैआ सह लुआद अर तैहा भेटा खुशी।
बिधाते करा ज़ोरै-ज़ोरै ज़ै-ज़ैकार।
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भज़न 113: OSJ
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