भज़न 11
11
बिधाता दी भरोस्सअ
गाज़ै-बाज़ै आल़ेए सैणैं लै राज़ै दाबेदो भज़न
1मुंह आसा आपणैं बिधाता दी भरोस्सअ,
तम्हैं किल्है बोला मुल्है एही ऐडी गल्ल,
“च़ेल्लू ज़िहअ डैअ दैई डेऊ उझै ज़ोता लै।”
2किल्हैकि कदुष्ट मणछ आसा न्हैरै दी लुक्की करै
भलै मणछा लै कतीरा बाहणां लै ताखुई रहै दै।
3ज़ै बधान काईदअ ई पठी बरैबाद होए,
तै निं भलअ मणछ किछ़ै करी सकदअ।
4बिधाता आसा आपणैं पबित्र भबनै,
सह आसा स्वर्गै आपणीं राज़गाद्दी प्रैंदै बेठअ द।
सह हआ सोभी मणछा भाल़अ लागअ द
कि तिंयां किज़ै करा।
5बिधाता परखा भलै अर बूरै मणछा राम्बल़ै करै,
सह करा कदुष्ट मणछा का खास्सी नफरत।
6तेऊ बरशाऊंणी कदुष्टा लै ज़ल़दी आग अर गंधक,
तेऊ बरशाऊंणी कदुष्टा लै ज़ल़दी आग अर गंधक,
7बिधाता आसा धर्मीं अर सह झ़ूरा भलै कामां लै,
तेऊ सेटा सका सिधअ सह ई मणछ डेऊई ज़ुंण भलै काम करा।
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भज़न 11: OSJ
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