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नहेम्याह 2

2
नहेम्याह का यरुशलेम जाणा
1अर्तक्षत्र राजा के बीसवें साल के नीसान नाम के महिन्‍ने म्ह, जिब उसके स्याम्ही दाखमधु था, फेर मन्‍नै दाखमधु ठाकै राजा तै दिया। इसतै पैहल्या मै उसके स्याम्ही कदे उदास ना होया था#2:1 स्याम्ही कदे उदास ना होया था नीसान का महीना था, बेबीलोन के कैलेंडर म्ह नए साल की शरुआत। नीसान नाम एक अक्‍कादियन शब्द तै आया सै जिसका मतलब सै उद्घाटन या शरुआत। यो इब्रानी कैलेंडर म्ह भी पैहला महीना था, जित्त इस ताहीं कनानी नाम अबीब दिया गया था। (देक्खां निर्गमन 13:4) यो मार्च के बीच तै अप्रैल कै बीच तक साल का बखत सै।2फेर राजा नै मेरे तै पूच्छया, “तू रोगी तो न्ही सै, फेर तेरा मुँह क्यूँ उतरया सै? या तो मन की ए उदासी होगी।” फेर मै घणा डर ग्या। 3मन्‍नै राजा तै कह्या, “राजा सदा जिन्दा रहवै! जिब वो नगर जिस म्ह मेरे पुरखां की कब्र सैं, उजाड़ पड्या सै अर उसके फाटक जळे होए सैं, तो मेरा मुँह क्यूँ ना उतरै?” 4राजा नै मेरे तै पूच्छया, “फेर तू के माँग्गै सै?” फेर मन्‍नै अपणे दिल म्ह सुर्ग के परमेसवर तै प्रार्थना करकै, राजा तै कह्या; 5“जै राजा नै भावै, अर तू अपणे दास तै खुश हो, तो मन्‍नै यहूदा अर मेरे पुरखां की कब्र के नगरां म्ह भेज, ताके मै उननै दुबारा बणाऊँ।” 6फेर राजा नै जिसकै धोरै राणी#2:6 राणी यद्यपि फारसी राजयां म्ह घणी सारी पत्नी राक्खण का रिवाज था, उनकी एक खास राणी होवै थी अर वोए राणी कुह्वावै थी। भी बेठ्ठी थी, मेरे तै पूच्छया, “तू कितणे दिन ताहीं यात्रा म्ह रहवैगा? अर कद वापस आवैगा?” आखर राजा मन्‍नै भेजण ताहीं खुश होया; अर मन्‍नै उसकै खात्तर एक बखत तय करया। 7फेर मन्‍नै राजा तै कह्या, “जै राजा नै भावै, तो महानद कै पार के अधिपतियाँ कै खात्तर इस मकसद तै चिट्ठी मन्‍नै दी जावैं के जिब ताहीं मै यहूदा परदेस म्ह ना पोहचू, तब ताहीं वे मन्‍नै अपणे-अपणे देश म्ह तै होकै जाण दें। 8अर सरकारी जंगळ के रुखाळे आसाप कै खात्तर भी इस मकसद तै चिट्ठी मेरे ताहीं दी जावै ताके वे मन्‍नै भवन तै लाग्गे होए राजगढ़ की कड़ियाँ कै खात्तर, अर शहरपनाह कै, अर उस घर कै खात्तर, जिस म्ह मै जाकै रहूँगा, लाकड़ी दे।” मेरे परमेसवर की दया की नजर मेरे पै थी, ज्यांतै राजा नै या बिनती कबूल कर ली।
9फेर मन्‍नै महानद कै पार के अधिपतियाँ कै धोरै जाकै उनतै राजा की चिट्ठी दी। राजा नै मेरै गैल सेनापति अर घुड़सवार भी भेज्जे थे। 10यो सुणकै के एक माणस इस्राएलियाँ के कल्याण का उपाय करण नै आया सै, होरोनी सम्बल्‍लत अर तोबियाह नाम के कर्मचारी जो अम्‍मोनी थे, उन दोनुआं नै घणाए बुरा लाग्या।#2:10 यरुशलेम ताहीं एक महान अर दृढ़ नगर बणाण का नहेम्याह का इरादा, सामरिया की समृद्धियाँ अर श्रेष्ठता म्ह बाधक था।
11जिब मै यरुशलेम पोहच ग्या, फेर ओड़ै तीन दिन रहया। 12फेर मै थोड़े माणसां नै लेकै रात नै उठ्या; मन्‍नै किसे तै न्ही बताया के मेरे परमेसवर नै यरुशलेम के हित कै खात्तर मेरै मन म्ह के पैदा करया था। अपणी सवारी के गधे नै छोड़ कोए पशु मेरै गैल ना था। 13मै रात नै तराई के फाटक म्ह तै होकै लिकड़या अर अजगर के चोए की ओड़, अर कूड़ा फाटक कै धोरै गया, अर यरुशलेम की टूटी पड़ी होई शहरपनाह अर जळे फाटकां ताहीं देख्या। 14फेर मै आग्गै बढ़कै चोए के फाटक अर राजा के कुण्ड कै धोरै गया; पर मेरी सवारी के पशु कै खात्तर आग्गै जाण की जगहां ना थी। 15फेर मै रात ए रात नाळे तै होकै शहरपनाह नै देखदा होया चढ़ ग्या; फेर घूमकै तराई कै फाटक तै भित्तर आया, अर इस तरियां बोहड़ आया। 16अर हाकिम न्ही जाणै थे के मै कित्त गया अर के करुँ था; बल्के मन्‍नै जिब ताहीं ना तो यहूदियाँ तै किमे बताया था अर ना याजकां अर ना रईसां अर ना हाकिमां अर ना दुसरे काम करण आळयां तै।
17फेर मन्‍नै उनतै कह्या, “थम तो आप देक्खो सो के हम किसी बुरी हालत म्ह सां, के यरुशलेम उजाड़ पड्या सै अर उसके फाटक जळे होए सैं। तो आओ, हम यरुशलेम की शहरपनाह नै बणावां, के भविष्य म्ह म्हारी बदनाम्मी ना होवै।” 18फेर मन्‍नै उन ताहीं बताया, के मेरे परमेसवर की दया की नजर मेरे पै किसी होई अर राजा नै मेरे तै के-के बात कही थी। फेर उननै कह्या, “आओ हम कमर बाँधकै बणाण लाग्गां।” अर उननै इस भले काम ताहीं करण कै खात्तर होसला राख लिया।
19यो सुणकै होरोनी सम्बल्‍लत अर तोबियाह नाम के कर्मचारी जो अम्‍मोनी थे, अर गेशेम नाम का एक अरबी, म्हारा मजाक उड़ाण लाग्गे; अर हमनै तुच्छ जाणकै कहण लाग्गे, “यो थम के काम करो सो। के थम राजा कै खिलाफ बलवा करोगे?” 20फेर मन्‍नै उनतै जवाब देकै उनतै कह्या, “सुर्ग का परमेसवर म्हारा काम सफल करैगा, ज्यांतै हम उसके दास कमर बाँधकै बणावांगें; पर यरुशलेम म्ह थारा ना तो कोए हिस्सा, ना हक अर ना स्मारक सै।”

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