YouVersion Logo
Search Icon

यशायाह 40

40
परमेसवर के लोग्गां नै शान्ति
1यशायाह#40:1 यशायाह भजन. 85:8; 2 कुरि. 1:4 नै फेर भविष्यवाणी करी, “म्हारा परमेसवर न्यू कहवै सै, मेरी प्रजा नै शान्ति द्यो, शान्ति द्यो!” 2यरुशलेम तै शान्ति की बात कहो; अर उसतै पुकारकै कहो के तेरी मुश्किल सेवा पूरी होई सै, तेरे अधर्म की सजा कबूल कर ली गई सै: यहोवा के हाथ तै तू अपणे सारे पाप की दुगणी सजा पा चुक्या सै।
3किसे की पुकार सुणाई देवै सै#40:3 मत्ती 3:3; मर. 1:3; मला. 3:1; यूह. 1:23, “जंगळ म्ह यहोवा का राह सुधारो, म्हारे परमेसवर कै खात्तर अराबा म्ह एक राजमार्ग चौरस करो। 4हर एक तराई भर दी जावै अर हर एक पहाड़ अर पहाड़ी गिरा दी जावै; जो टेढ़ा सै वो सीध्धा अर जो ऊँच्‍चा नीच्‍चा सै वो चौरस करया जावै। 5फेर#40:5 फेर भजन. 72:19; लूका. 3:6 यहोवा का तेज प्रगट होवैगा अर सारे प्राणी उस ताहीं एक साथ देखैगें; क्यूँके यहोवा नै खुद ए इसा कह्या सै।”
6बोलण आळे का वचन सुणाई दिया, “प्रचार कर!” मन्‍नै कह्या, “मै के प्रचार करुँ?” सारे प्राणी घास सैं, उनकी शोभा मैदान के फूल की तरियां सै। 7जिब यहोवा की साँस#40:7 साँस इब्रानी भाषा मै रुआक शब्द साँस के लिए आत्मा होवै सै उसपै चाल्‍लै सै, फेर घास सूख जावै सै, अर फूल मुरझा जावै सै; बेसक प्रजा घास सै। 8घास तो सूख जावै, अर फूल मुरझा जावै सै; पर म्हारे परमेसवर का वचन सदा अटल रहवैगा#40:8 म्हारे परमेसवर का वचन सदा अटल रहवैगा परमेसवर का वचन का संदर्भ या तो गुलाम्मी तै उसकी प्रजा की रक्षा अर उद्धार की प्रतिज्ञा तै सै या सामान्य मतलब हो सकै सै के उसकी प्रतिज्ञाएँ मजबूत अर बिना बदलण आळी सै।
9हे सिय्योन नै शुभ समाचार सुणाण आळी, ऊँच्‍चे पहाड़ पै चढ़ जा; हे यरुशलेम नै शुभ समाचार सुणाण आळी, घणे ऊँच्‍चे शब्द तै सुणा, ऊँच्‍चे शब्द तै सुणा, ना डरै; यहूदा के नगरां तै कह, “अपणे परमेसवर नै देक्खो!” 10देक्खो, प्रभु यहोवा ताकत दिखान्दा होया आण लागरया सै, वो अपणे भुजबल तै राज करैगा; देक्खो, जो मजदूरी देण की सै वो उसके धोरै सै अर जो बदला देण का सै वो उसके हाथ म्ह सै। 11परमेसवर#40:11 परमेसवर यहे. 34:23; मीका. 5:4 पाळीयाँ की तरियां अपणे झुण्ड नै चरावैगा, वो भेड्डां के बच्‍चयां नै गोद म्ह लिए रहवैगा अर दूध पिलाण आळियाँ नै सहज-सहज ले चाल्‍लैगा।
इस्राएल का अतुल्यनीय परमेसवर
12किसनै महासागर ताहीं चुळु तै माप्या अर किसके फित्ते तै अकास का नाप होया, किसनै धरती की माट्टी ताहीं नपुए म्ह भरया अर पहाड़ां ताहीं तराजू म्ह अर पहाड़ियाँ ताहीं काण्डे म्ह तोल्या सै? 13किसनै यहोवा की आत्मा ताहीं राह बताया या उसका सलाहकार होकै उस ताहीं ज्ञान सिखाया सै#40:13 सलाहकार होकै उस ताहीं ज्ञान सिखाया सै वो सलाह कै खात्तर ना तो माणसां पै ना ए स्वर्गदूतां पै निर्भर करै सै। वो सर्वोच्‍च सै, आत्म-निर्भर सै अर अनन्त सै। उसनै सलाह देण लायक कोए न्ही सै।? 14उसनै किसपै तै सलाह ली अर किसनै उस ताहीं समझाकै न्याय का रास्ता बता दिया अर ज्ञान सिखाकै बुद्धि का राह बता दिया सै? 15देक्खो, जातियाँ तो डोल की एक बूँद या तराजू के पलड्या पै की धूळ कै लायक ठैहरी; देक्खो, यहोवा द्वीपां नै धूळ के किणक्यां की तरियां ठावै सै। 16लबानोन के सारे पेड़ भी ईंधण कै खात्तर थोड़ा रहवैंगे अर उस म्ह के जीव-जन्तु होमबलि कै खात्तर काफी न्ही होवैंगे। 17सारी जातियाँ उसके स्याम्ही कुछ न्ही सैं, वे उसकी नजर म्ह लेश अर शून्य तै भी कम ठैहरी सैं।
18थम परमेसवर नै किसकी तरियां बताओगे अर उसकी बराबरी किसतै करोगे? 19मूरत जिसनै कोए कारीगर ढाळै सै, सुनार उस ताहीं सोन्‍ने तै मढ़ै अर उसके खात्तर चाँदी की साँकळ ढाळकै बणावै सै। 20जो कंगाल इतणी भेंट न्ही चढ़ा सकदा, वो इसा दरखत चुण लेवै सै जो ना सड़ै; फेर एक निपुण कारीगर ढूँढ कै मूरत खुदवावै अर उसनै इसा स्थिर करावै सै के वो हाल न्ही सकै।
21के थम न्ही जाणदे? के थमनै न्ही सुण्या? के थारे ताहीं शरु तै ए न्ही बताया गया? के थमनै धरती की नींव पड़ण कै बखत तै ए विचार न्ही करया? 22यो वो सै जो धरती के घेरे कै उप्पर अकासमण्डल पै विराजमान सै; अर धरती के रहण आळे टिड्डी की तरियां सै; जो अकास नै मलमल की तरियां फैलावै अर इसा ताण देवै सै जिसा रहण कै खात्तर तम्बू ताण्या जावै सै; 23परमेसवर बड़े-बड़े हाकिमां नै निकम्मा कर देवै सै, अर धरती के अधिकारियां नै शून्य की तरियां कर देवै सै।
24वे रोप्पे जान्दे, वे बोए जान्दे, उनके ठूँठ धरती म्ह जड़ पकड़ पान्दे के वो उनपै हवा बहावै अर वे सूख जान्दे, अर आँधी उननै भूसे की तरियां उड़ा ले जावै सै।
25इस करकै थम मेरै ताहीं किसकी तरियां बताओगे के मै उसके बराबर ठहरूँ? उस पवित्र परमेसवर का योए वचन सै। 26अपणी आँख उप्पर ठाकै आसमान ताहीं देक्खो, किसनै इन ताहीं बणाया? वो इन गणां नै गिण-गिणकै लिकाड़ै सै, उन सब नै नाम ले-लेकै बुलावै सै? वो इसा ताकतवर अर भोत ताकतवर सै के उन म्ह तै कोए बिना आए न्ही रहन्दा।
27हे याकूब, तू क्यूँ कहवै सै, हे इस्राएल तू क्यूँ बोल्‍लै सै, “मेरा राह यहोवा तै छिप्या होया सै, मेरा परमेसवर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता न्ही करदा?” 28के थम न्ही जाणदे? के थमनै न्ही सुण्या? यहोवा जो सनातन परमेसवर अर धरती भर का सृजनहार सै, वो ना थकदा, ना आराम की जरूरत सै, उसकी बुद्धि अगम सै। 29वो थके होया नै बल देवै सै अर कमजोर नै घणी ताकत देवै सै। 30तरूण तो थक जावै सै अर उननै आराम की जरूरत होवै सै, अर जवान ठोक्‍कर खाकै गिर जावै सै; 31पर जो यहोवा की मदद खात्तर बाट देक्खै सै, वे नया बल पान्दे जावैंगे, वे उकाबां की तरियां उड़ैंगे, वे दौड़ैंगे अर उननै आराम की जरूरत न्ही होवैगी, वे चाल्‍लैगें अर थकैंगे न्ही।

Currently Selected:

यशायाह 40: BGC

Highlight

Copy

Compare

Share

None

Want to have your highlights saved across all your devices? Sign up or sign in