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व्यवस्थाविवरण 30

30
इस्राएलियाँ की वापसी का वचन
1“फेर जिब आशीष अर श्राप की ये सारी बात जो मन्‍नै थारै तै कह सुणाई सै तेरै पै घटै, अर तू उन सारी जात्तां के बीच म्ह रहकै, जड़ै तेरा परमेसवर यहोवा तन्‍नै मजबूर करकै पोहचावैगा इन बात्तां नै याद करै, 2अर अपणी सन्तान समेत अपणे सारे मन अर सारे प्राण तै अपणे परमेसवर यहोवा की ओड़ बोहड़कै उसकै धोरै बोहड़ आवै, अर इन सारे हुकमां कै मुताबिक जो मै आज तन्‍नै सुणाऊँ सूं उसकी बात मान्‍नै; 3फेर तेरा परमेसवर यहोवा तन्‍नै बँधुआई तै बोहड़ा ले आवैगा, अर तेरै पै दया करकै उन सारे देशां के माणसां म्ह तै जिनकै बीच म्ह वो तन्‍नै तित्तर-भित्तर कर देवैगा फेर कठ्ठा करैगा। 4चाहे धरती के सिरे ताहीं तेरा मजबूरण पोहचाया जाणा हो, फेर भी तेरा परमेसवर यहोवा तन्‍नै ओड़ै तै ले आकै कठ्ठा करैगा। 5अर तेरा परमेसवर यहोवा तन्‍नै उस्से देश म्ह पोहचावैगा जिसके तेरे पुरखाँ हकदार होए थे, अर तू फेर उसका अधिकारी होवैगा; अर वो तेरी भलाई करैगा, अर तन्‍नै तेरै पुरखाँ तै भी गिणती म्ह घणा बढ़ावैगा। 6अर तेरा परमेसवर यहोवा तेरे अर तेरै वंश कै मन का खतना करैगा, के तू अपणे परमेसवर यहोवा तै अपणे सारे मन अर सारे प्राण कै गेल्या प्यार करै, जिसतै तू जिन्दा रहवै। 7अर तेरा परमेसवर यहोवा ये सारे श्राप की बात तेरै बैरी पै जो तेरै तै बैर करकै तेरै पाच्छै पड़ैंगें भेज्जैगा। 8अर तू मुड़ैगा अर यहोवा की सुणैगा, अर इन सारे हुकमां नै मान्‍नैगा जो मै आज तन्‍नै सुणाऊँ सूं। 9अर यहोवा तेरी भलाई कै खात्तर तेरे सारे काम्मां म्ह, अर तेरी सन्तान, अर पशुआं कै बच्यां, अर धरती की पैदावार म्ह तेरी बढ़दी करैगा; क्यूँके यहोवा फेर तेरै उप्पर भलाई कै खात्तर उसाए आनन्द करैगा, जिसा उसनै तेरै पूर्वजां कै उप्पर करया था; 10क्यूँके तू अपणे परमेसवर यहोवा की बात सुणकै उसके हुकमां अर विधियाँ नै जो इस नियम-कायदे की किताब म्ह लिक्खे सै मान्या करैगा, अर अपणे परमेसवर यहोवा की ओड़ तै अपणे सारे मन अर सारे प्राण तै मन फिरावैगा।”
जीवन या मरण
11“देक्खो, यो जो हुकम मै आज तेरै ताहीं सुणाऊँ सूं, वो ना तो तेरै खात्तर ओक्खे, अर ना दूर सै। 12अर ना तो यो अकास म्ह सै, के तू कहवै, ‘म्हारै खात्तर अकास म्ह चढ़कै उस ताहीं म्हारै धोरै ले आवै, अर म्हारै तै सुणावै के हम उसनै मान्‍ना?’ 13अर ना यो समुन्दर पार सै, के तू कहवै, ‘कौण म्हारै खात्तर समुन्दर पार जावै, अर उस ताहीं म्हारै धोरै ले आवै, अर म्हारै तै सुणावै के हम उसनै मान्‍ना?’ 14पर यो वचन तेरै घणे धोरै, बल्के तेरै मुँह अर मन म्ह ए सै ताके तू इसपै चाल्‍लै।”
15“सुण, आज मन्‍नै तेरे ताहीं जीवन अर मरण, नुकसान अर फायदा दिखाया सै। 16क्यूँके मै आज तन्‍नै हुकम दियुँ सूं, के अपणे परमेसवर यहोवा तै प्यार करिये, अर उसकै रास्तयां पै चालिये, अर उसके हुकमां, विधियाँ, अर नियमां ताहीं मानिये, जिसतै तू जिन्दा रहवै, अर बढ़दा जावै, अर तेरा परमेसवर यहोवा उस देश म्ह जिसका हकदार होण ताहीं तू जाण लागरया सै, तन्‍नै आशीष देवै। 17पर जै तेरा मन भटक ज्या, अर तू ना सुणै, अर भटक कै पराए देवत्यां ताहीं दण्डवत करै अर उनकी आराधना करण लाग्गै, 18तो मै थमनै आज यो समझाऊँ सूं, के थम जरुर नाश हो जाओगे; अर जिस देश का हकदार होण कै खात्तर तू यरदन नदी के पार जाण लागरया सै, उस देश म्ह थम घणे दिनां कै खात्तर रहण ना पाओगे। 19मै आज अकास अर धरती दोनुआ ताहीं थारै स्याम्ही इस बात की गवाही बणाऊँ सूं, के मन्‍नै जीवन अर मरण, आशीष अर श्राप ताहीं थारै आग्गै धरया सै; इस करकै तू जीवन नै ए अपणाले, के तू अर तेरी पीढ़ी दोन्‍नु जिन्दा रहवै; 20इस करकै अपणे परमेसवर यहोवा तै प्यार करो, अर उसकी बात मान्‍नो, अर उसतै लिपटे रहो; क्यूँके तेरा जीवन अर लाम्बी उम्र योए सै, अर इसा करण तै जिस देश ताहीं यहोवा नै अब्राहम, इसहाक, अर याकूब, यानिके तेरै पूर्वजां तै देण की कसम खाई थी उस देश म्ह तू बस्या रहवैगा।”

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