2 शमूएल 2
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दाऊद के हेब्रोन म्ह राज्य करण का वृत्तान्त
1इसकै बाद दाऊद नै यहोवा तै पूच्छया, “के मै यहूदा के किसे नगर म्ह जाऊँ?” यहोवा नै उसतै जवाब दिया, “हाँ, जा।” दाऊद नै फेर पूच्छया, “किस नगर म्ह जाऊँ?” उसनै कह्या, “हेब्रोन#2:1 हेब्रोन हेब्रोन। यहूदा के दक्षिणी पहाड़ी देश म्ह यो महत्वपूर्ण नगर (यरुशलेम के दक्षिण-पश्चिमी म्ह तकरीबन 30 किलोमीटर [19 मील] अर समुन्दर तल तै 915 मीटर [2,975 फुट] उप्पर) का पैहला उल्लेख उत्पत्ति 13:18 म्ह करया गया सै अर इसके बाद अक्सर पुराणे नियम म्ह दिखाई देवै सै। इसे किर्यतअर्बा (उत्पत्ति 23:2) और मम्रे (उत्पत्ति 35:27) भी कह्या जावै सै। इस प्रसंग म्ह इसका राजनैतिक महत्व स्पष्ट हो जावै सै। म्ह।” 2फेर दाऊद यिज्रेली नगर अहीनोअम, अर कर्मेली नगर के नाबाल की बिधवा अबीगैल नाम की, अपणी दोन्नु घर आळियाँ समेत ओड़ै गया। 3दाऊद अपणे साथियाँ नै भी एक-एक कै घराने समेत ओड़ै लेग्या; अर वे हेब्रोन आसै-पासै के गाम्मां म्ह रहण लाग्गे। 4अर यहूदी लोग गए, अर ओड़ै दाऊद का अभिषेक करया के वो यहूदा के घराने का राजा हो। जिब दाऊद नै यो समाचार मिल्या, के जिननै शाऊल ताहीं माट्टी दी वे गिलाद नगर के याबेश नगर के माणस सैं। 5फेर दाऊद नै दूत्तां के जरिये गिलाद के याबेश के माणसां कै धोरै यो कुह्वा भेज्या, “यहोवा की आशीष थारे पै हो, क्यूँके थमनै अपणे राजा शाऊल पै या दया करकै उस ताहीं माट्टी दी।”
6इस खात्तर इब यहोवा थारे तै दया अर सच्चाई का बरताव करै; अर मै भी थारी इस भलाई का बदला थारे ताहीं दियुँगा, क्यूँके थमनै यो काम करया सै। 7इब हिम्मत राक्खो, अर शूरवीर बणो; क्यूँके थारा राजा शाऊल मर ग्या, अर यहूदा के घराने नै अपणे उप्पर राजा होण खात्तर मेरा अभिषेक करया सै।
ईशबोशेत इस्राएल का राजा
8पर नेर का बेट्टा अब्नेर जो शाऊल का प्रधान सेनापति था, उसनै शाऊल के बेट्टे ईशबोशेत ताहीं गैल ले पार जाकै महनैम#2:8 महनैम यरदन नदी के पार महनैम नगर तक म्ह पोहचाया; 9अर उसनै ईशबोशेत ताहीं गिलाद अशूरियाँ के देश, यिज्रेल, एप्रैम, बिन्यामीन, बल्के सारे इस्राएल परदेस पै राजा ठैहराया। 10शाऊल का बेट्टा ईशबोशेत चाळीस साल का था जिब वो इस्राएल पै राज करण लाग्या, अर दो साल ताहीं राज्य करदा रह्या। पर यहूदा का घराना दाऊद कै पक्ष म्ह रह्या। 11अर दाऊद का हेब्रोन म्ह यहूदा के घराने पै राज्य करण का समय साढ़े सात साल था।
यहूदा अर इस्राएल के बीच युद्ध
12एक दिन नेर का बेट्टा अब्नेर, अर शाऊल के बेट्टे ईशबोशेत के माणस, महनैम यरदन नदी के पार गिबोन नगर तक आए। 13फेर सरूयाह#2:13 सरूयाह दाऊद की भाण वास्तव म्ह योआब बाद म्ह बदला लेण खात्तर अब्नेर को मार डालैगा। 3:27 का बेट्टा योआब, अर दाऊद के आदमी, हेब्रोन तै लिकड़कै उनतै गिबोन के जलकुण्ड कै धोरै मिले; अर दोन्नु दल उस जलकुण्ड के एक-एक ओड़ बैठगे। 14फेर अब्नेर नै योआब तै कह्या, “जवान माणस उठकै म्हारे स्याम्ही कुश्ती करै।” योआब नै कह्या, “वे उठैं।” 15फेर वे उठे, अर बिन्यामीन गोत्र के, यानिके शाऊल के बेट्टे ईशबोशेत के पक्ष खात्तर बारहा आदमी गिणकै लिकड़े, अर दाऊद के माणस भी बारहा लिकड़े। 16अर उननै एक दुसरे का सिर पकड़कै अपणी-अपणी तलवार एक दुसरे के पाँजर म्ह घोप दी; अर वे एक्के साथ मरे। इसतै उस जगहां का नाम हेल्कथस्सूरीम#2:16 हेल्कथस्सूरीम तलवार की जगहां पड़या, वा गिबोन म्ह सै।
असाहेल की मौत
17उस दिन बड़ा घोर युद्ध होया; अर अब्नेर अर इस्राएल के माणस दाऊद के सिपाहियाँ तै हारगे। 18ओड़ै योआब, अबीशै, अर असाहेल नाम के सरूयाह जनान्नी के तीन्नु बेट्टे थे। असाहेल जंगळी हिरण के जिसा तेज भाजण आळा था। 19फेर असाहेल अब्नेर का पिच्छा करण लाग्या, अर उसका पिच्छा करदे होए ना तो सोळी ओड़ मुड़या ना ओळी ओड़। 20अब्नेर नै पाच्छै मुड़कै पूच्छया, “के तू असाहेल सै?” उसनै कह्या, “हाँ मै वोए सूं।” 21अब्नेर नै उसतै कह्या, “चाहे सोळी, चाहे ओळी ओड़ मुड़, किसे जवान ताहीं पकड़कै उसका कवच ले ले।” पर असाहेल नै उसका पिच्छा न्ही छोड्या। 22अब्नेर नै असाहेल तै फेर कह्या, “मेरा पिच्छा छोड़ दे; मन्नै क्यूँ तेरे ताहीं मारकै माट्टी म्ह मिला देणा पड़ै? इसा करकै मै तेरे भाई योआब नै अपणा मुँह किस तरियां दिखाऊँगा#2:22 इसा करकै मै तेरे भाई योआब नै अपणा मुँह किस तरियां दिखाऊँगा वास्तव म्ह योआब बाद म्ह बदला लेण खात्तर अब्नेर नै मार देगा। (2 शमूएल 3:27) ?” 23तोभी उसनै हट जाण तै मना करया; फेर अब्नेर नै अपणे भाले की पिछाड़ी उसके पेट म्ह इसी मारी, के भाला आर-पार होकै पाच्छै लिकड़या; अर वो ओड़ैए गिरकै मर ग्या। जितने माणस उस जगहां पै आए जित्त असाहेल गिरकै मर ग्या, ओड़ै वो सारे चुपचाप खड़े रहे।
अब्नेर अर योआब
24पर योआब अर अबीशै अब्नेर का पिच्छा करदे रहे; अर सूरज डूबदे-डूबदे वे अम्माह नाम के उस पहाड़ी तक पोहचे, जो गिबोन के जंगळ की राह म्ह गीह कै स्याम्ही सै। 25अर बिन्यामीनी सिपाही अब्नेर कै पाच्छै होकै एक दल होगे, अर एक पहाड़ी की चोट्टी पै खड़े होए। 26फेर अब्नेर योआब नै पुकारकै कहण लाग्या, “के तलवार सदा चाल्दी रहवै? के तू न्ही जाणदा के इसका फळ दुखदाई होवैगा? तू कद ताहीं अपणे माणसां नै हुकम न्ही देवैगा, के वे अपणे भाईयाँ का पिच्छा छोड़कै बोहड़ जावै?” 27योआब नै उत्तर दिया, “परमेसवर के जीवन की कसम, के जै तू इसा न्ही बोल्या होन्दा, तो मेरे सिपाहियाँ नै सबेरै तक अपणे भाईयाँ ताहीं भगा दिया होन्दा।” 28फेर योआब नै नरसिंगा फूँक्या; अर सारे माणस ठहरगे, अर फेर इस्राएलियाँ का पिच्छा न्ही करया, अर फेर लड़ाई न्ही करी।
29अब्नेर अपणे माणसां समेत उस्से दिन रातों-रात अराबा तै होकै गया; अर यरदन पार हो सारे बित्रोन देश म्ह होकै महनैम म्ह पोहच्या। 30योआब अब्नेर का पिच्छा छोड़कै बोहड़या; अर जिब उसनै सारे माणसां ताहीं कठ्ठा करया, फेर के देख्या, के दाऊद के सिपाहियाँ म्ह तै उन्नीस सिपाही अर असाहेल भी न्ही सैं। 31पर दाऊद के माणसां नै बिन्यामीनियाँ अर अब्नेर के माणसां ताहीं इसा मारया के उन म्ह तै तीन सौ साठ माणस मरगे। 32अर योआब अर उसके सिपाहियाँ नै असाहेल ताहीं ठाकै उसके पिता के कब्रिस्तान म्ह, जो बैतलहम म्ह था, माट्टी दी। फेर योआब अपणे माणसां समेत रात भर चालकै सबेरै ताहीं हेब्रोन म्ह पोहच्या।
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