स्तोत्र 100:4
स्तोत्र 100:4 HCV
धन्यवाद के भाव में उनके द्वारों में और की स्तुति-आराधना के भाव में उनके आंगनों में प्रवेश करिये; उनकी महिमा को धन्य कहिये.
धन्यवाद के भाव में उनके द्वारों में और की स्तुति-आराधना के भाव में उनके आंगनों में प्रवेश करिये; उनकी महिमा को धन्य कहिये.