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मुकाशफ़ा 3:20
किताब-ए मुक़द्दस
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देख, मैं दरवाज़े पर खड़ा खटखटा रहा हूँ। अगर कोई मेरी आवाज़ सुनकर दरवाज़ा खोले तो मैं अंदर आकर उसके साथ खाना खाऊँगा और वह मेरे साथ।
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मुकाशफ़ा 3:15-16
मैं तेरे कामों को जानता हूँ। तू न तो सर्द है, न गरम। काश तू इनमें से एक होता! लेकिन चूँकि तू नीमगरम है, न गरम, न सर्द, इसलिए मैं तुझे क़ै करके अपने मुँह से निकाल फेंकूँगा।
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मुकाशफ़ा 3:19
जिनको मैं प्यार करता हूँ उनकी मैं सज़ा देकर तरबियत करता हूँ। अब संजीदा हो जा और तौबा कर।
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मुकाशफ़ा 3:8
मैं तेरे कामों को जानता हूँ। देख, मैंने तेरे सामने एक ऐसा दरवाज़ा खोल रखा है जिसे कोई बंद नहीं कर सकता। मुझे मालूम है कि तेरी ताक़त कम है। लेकिन तूने मेरे कलाम को महफ़ूज़ रखा है और मेरे नाम का इनकार नहीं किया।
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मुकाशफ़ा 3:21
जो ग़ालिब आए उसे मैं अपने साथ अपने तख़्त पर बैठने का हक़ दूँगा, बिलकुल उसी तरह जिस तरह मैं ख़ुद भी ग़ालिब आकर अपने बाप के साथ उसके तख़्त पर बैठ गया।
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मुकाशफ़ा 3:17
तू कहता है, ‘मैं अमीर हूँ, मैंने बहुत दौलत हासिल कर ली है और मुझे किसी भी चीज़ की ज़रूरत नहीं।’ और तू नहीं जानता कि तू असल में बदबख़्त, क़ाबिले-रहम, ग़रीब, अंधा और नंगा है।
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मुकाशफ़ा 3:10
तूने मेरा साबितक़दम रहने का हुक्म पूरा किया, इसलिए मैं तुझे आज़माइश की उस घड़ी से बचाए रखूँगा जो पूरी दुनिया पर आकर उसमें बसनेवालों को आज़माएगी।
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मुकाशफ़ा 3:11
मैं जल्द आ रहा हूँ। जो कुछ तेरे पास है उसे मज़बूती से थामे रखना ताकि कोई तुझसे तेरा ताज छीन न ले।
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मुकाशफ़ा 3:2
जाग उठ! जो बाक़ी रह गया है और मरनेवाला है उसे मज़बूत कर। क्योंकि मैंने तेरे काम अपने ख़ुदा की नज़र में मुकम्मल नहीं पाए।
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