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मुकाशफ़ा 4:11
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
“ऐ रब हमारे ख़ुदा, तू जलाल, इज़्ज़त और क़ुदरत के लायक़ है। क्योंकि तूने सब कुछ ख़लक़ किया। तमाम चीज़ें तेरी ही मरज़ी से थीं और पैदा हुईं।”
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मुकाशफ़ा 4:8
इन चार जानदारों में से हर एक के छः पर थे और जिस्म पर हर जगह आँखें ही आँखें थीं, बाहर भी और अंदर भी। दिन-रात वह बिलानाग़ा कहते रहते हैं, “क़ुद्दूस, क़ुद्दूस, क़ुद्दूस है रब क़ादिरे-मुतलक़ ख़ुदा, जो था, जो है और जो आनेवाला है।”
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मुकाशफ़ा 4:1
इसके बाद मैंने देखा कि आसमान में एक दरवाज़ा खुला हुआ है और तुरम की-सी आवाज़ ने जो मैंने पहले सुनी थी कहा, “इधर ऊपर आ। फिर मैं तुझे वह कुछ दिखाऊँगा जिसे इसके बाद पेश आना है।”
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