1
अमसाल 3:5-6
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
पूरे दिल से रब पर भरोसा रख, और अपनी अक़्ल पर तकिया न कर। जहाँ भी तू चले सिर्फ़ उसी को जान ले, फिर वह ख़ुद तेरी राहों को हमवार करेगा।
Compare
Explore अमसाल 3:5-6
2
अमसाल 3:7
अपने आपको दानिशमंद मत समझना बल्कि रब का ख़ौफ़ मानकर बुराई से दूर रह।
Explore अमसाल 3:7
3
अमसाल 3:9-10
अपनी मिलकियत और अपनी तमाम पैदावार के पहले फल से रब का एहतराम कर, फिर तेरे गोदाम अनाज से भर जाएंगे और तेरे बरतन मै से छलक उठेंगे।
Explore अमसाल 3:9-10
4
अमसाल 3:3
शफ़क़त और वफ़ा तेरा दामन न छोड़ें। उन्हें अपने गले से बाँधना, अपने दिल की तख़्ती पर कंदा करना।
Explore अमसाल 3:3
5
अमसाल 3:11-12
मेरे बेटे, रब की तरबियत को रद्द न कर, जब वह तुझे डाँटे तो रंजीदा न हो। क्योंकि जो रब को प्यारा है उस की वह तादीब करता है, जिस तरह बाप उस बेटे को तंबीह करता है जो उसे पसंद है।
Explore अमसाल 3:11-12
6
अमसाल 3:1-2
मेरे बेटे, मेरी हिदायत मत भूलना। मेरे अहकाम तेरे दिल में महफ़ूज़ रहें। क्योंकि इन्हीं से तेरी ज़िंदगी के दिनों और सालों में इज़ाफ़ा होगा और तेरी ख़ुशहाली बढ़ेगी।
Explore अमसाल 3:1-2
7
अमसाल 3:13-15
मुबारक है वह जो हिकमत पाता है, जिसे समझ हासिल होती है। क्योंकि हिकमत चाँदी से कहीं ज़्यादा सूदमंद है, और उससे सोने से कहीं ज़्यादा क़ीमती चीज़ें हासिल होती हैं। हिकमत मोतियों से ज़्यादा नफ़ीस है, तेरे तमाम ख़ज़ाने उसका मुक़ाबला नहीं कर सकते।
Explore अमसाल 3:13-15
8
अमसाल 3:27
अगर कोई ज़रूरतमंद हो और तू उस की मदद कर सके तो उसके साथ भलाई करने से इनकार न कर।
Explore अमसाल 3:27
9
अमसाल 3:19
रब ने हिकमत के वसीले से ही ज़मीन की बुनियाद रखी, समझ के ज़रीए ही आसमान को मज़बूती से लगाया।
Explore अमसाल 3:19