1
अमसाल 4:23
किताब-ए मुक़द्दस
DGV
तमाम चीज़ों से पहले अपने दिल की हिफ़ाज़त कर, क्योंकि यही ज़िंदगी का सरचश्मा है।
Compare
Explore अमसाल 4:23
2
अमसाल 4:26
अपने पाँवों का रास्ता चलने के क़ाबिल बना दे, ध्यान दे कि तेरी राहें मज़बूत हैं।
Explore अमसाल 4:26
3
अमसाल 4:24
अपने मुँह से झूट और अपने होंटों से कजगोई दूर कर।
Explore अमसाल 4:24
4
अमसाल 4:7
हिकमत इससे शुरू होती है कि तू हिकमत अपना ले। समझ हासिल करने के लिए बाक़ी तमाम मिलकियत क़ुरबान करने के लिए तैयार हो।
Explore अमसाल 4:7
5
अमसाल 4:18-19
लेकिन रास्तबाज़ की राह तुलूए-सुबह की पहली रौशनी की मानिंद है जो दिन के उरूज तक बढ़ती रहती है। इसके मुक़ाबले में बेदीन का रास्ता गहरी तारीकी की मानिंद है, उन्हें पता ही नहीं चलता कि किस चीज़ से ठोकर खाकर गिर गए हैं।
Explore अमसाल 4:18-19
6
अमसाल 4:6
हिकमत तर्क न कर तो वह तुझे महफ़ूज़ रखेगी। उससे मुहब्बत रख तो वह तेरी देख-भाल करेगी।
Explore अमसाल 4:6
7
अमसाल 4:13
तरबियत का दामन थामे रह! उसे न छोड़ बल्कि महफ़ूज़ रख, क्योंकि वह तेरी ज़िंदगी है।
Explore अमसाल 4:13
8
अमसाल 4:14
बेदीनों की राह पर क़दम न रख, शरीरों के रास्ते पर मत जा।
Explore अमसाल 4:14
9
अमसाल 4:1
ऐ बेटो, बाप की नसीहत सुनो, ध्यान दो ताकि तुम सीखकर समझ हासिल कर सको।
Explore अमसाल 4:1